Monday, April 20, 2026
spot_img
Home Blog

उत्तराखंड में जून में जारी हो सकती है पंचायत चुनावों की अधिसूचना

देहरादून: उत्तराखंड में पंचायत के खाली पड़े पदों पर जल्द उपचुनाव हो सकता है। पंचायती राज विभाग ने इससे जुड़ा प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। उम्मीद है कि राज्य निर्वाचन आयोग मई में पंचायत के खाली पड़े पदों पर उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। प्रदेश में करीब 3000 पदों के लिए ये उपचुनाव होना है, जिसमें सबसे बड़ी संख्या पंचायत में वार्ड मेंबर्स की है, वही ग्राम प्रधान के दो और क्षेत्र पंचायत के एक रिक्त पद के लिए भी उपचुनाव होगा।

उत्तराखंड में पंचायत स्तर पर लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में अब तेजी देखने को मिल रही है। पंचायती राज विभाग ने इन रिक्त पदों पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करते हुए प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया है।

राज्य निर्वाचन आयोग अगले महीने यानी मई में उपचुनाव की अधिसूचना जारी कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो प्रदेश भर में हजारों पदों पर जनप्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्यों को गति मिलेगी। जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब 3000 पद ऐसे हैं, जो विभिन्न कारणों से रिक्त पड़े हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों की है, जो स्थानीय शासन व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।

इसके अलावा ग्राम प्रधान के दो पद और क्षेत्र पंचायत सदस्य का एक पद भी रिक्त है, जिन पर उपचुनाव प्रस्तावित है। इन पदों के खाली रहने से कई पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे, जिसे देखते हुए सरकार और विभाग ने अब इस दिशा में कदम तेज कर दिए हैं।

सचिव पराग मधुकर धकाते ने बताया कि जिन ग्राम पंचायतों और क्षेत्र पंचायतों में पद रिक्त थे, उनकी सूची तैयार कर राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दी गई है। पंचायत चुनाव कराने का अधिकार राज्य निर्वाचन आयोग के पास होता है और वही इस पूरी प्रक्रिया को संचालित करता है। विभाग की ओर से केवल रिक्त पदों की सूचना और आवश्यक विवरण उपलब्ध कराया जाता है।

विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते ने यह भी कहा कि फिलहाल राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से उपचुनाव की अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन उम्मीद है कि मई महीने तक इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित होगा और निर्धारित समय सीमा के भीतर मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

दरअसल, पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भूमिका बेहद अहम होती है। ग्राम पंचायतों में वार्ड सदस्य और प्रधान गांव के विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन पदों का लंबे समय तक खाली रहना विकास कार्यों की गति को प्रभावित करता है। कई जगहों पर योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने में बाधाएं भी सामने आई हैं। यही वजह है कि सरकार और पंचायती राज विभाग इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए उपचुनाव की प्रक्रिया को जल्द पूरा करना चाहते हैं।उपचुनाव के माध्यम से न केवल रिक्त पदों को भरा जाएगा, बल्कि स्थानीय लोकतंत्र को भी मजबूती मिलेगी। इससे गांवों में जनभागीदारी बढ़ेगी और विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। राज्य निर्वाचन आयोग अधिसूचना जारी करने से पहले सभी जरूरी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। इसमें मतदाता सूची का सत्यापन, मतदान केंद्रों की तैयारी और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं शामिल है।

देहरादून में पीएम मोदी के कार्यक्रम पर गणेश गोदियाल ने निशाना साधा

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून दौरे पर उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों और जनता से जुड़े सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बीते रोज कांग्रेस द्वारा 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगा गया था, जो सीधे-सीधे उत्तराखंड की जनता और प्रदेश की व्यवस्था से जुड़े सवाल थे। दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने इन सवालों को ‘चिमटे से भी नहीं छुआ।
उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के गौरवशाली सैन्य परंपरा का जिक्र तो किया, लेकिन सच्चाई यह है कि केंद्र सरकार द्वारा लाई गई अग्निपथ योजना ने सेना में भर्ती होने का सपना संजोय युवाओं के आकांक्षाओं को चकनाचूर कर दिया. प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य में बढ़ते महिला अपराधों पर चिंता जताते हुए कहा कि, उत्तराखंड आज महिला अपराध के मामलों में शीर्ष राज्यों में शामिल हो गया है। चिंताजनक बात यह है कि इन मामलों में सत्तारूढ़ दल के लोगों की संलिप्तता के आरोप सामने आ रहे हैं।
अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि, इस मामले में भाजपा के कई बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि जांच किस स्थिति में है। इसके अलावा प्रदेश में सामने आए भर्ती घोटालों पर भी प्रधानमंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की, जो युवाओं के भविष्य से सीधा जुड़ा विषय है।
दिल्ली-देहरादून हाईवे के लोकार्पण पर प्रतिक्रिया देते हुए गणेश गोदियाल ने कहा कि, यह परियोजना यदि ‘भाग्य रेखा’ है, तो सरकार यह स्पष्ट करे कि इससे उत्तराखंड को वास्तविक लाभ क्या मिलेगा? क्या उत्तराखंड को स्थाई राजधानी मिल जाएगी? भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए लोकायुक्त की नियुक्ति होगी? एक सख्त भू कानून मिलेगा?
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि, दिल्ली से देहरादून की यात्रा 2.5 घंटे में पूरी होने की सुविधा ने स्थानीय निवासियों में असमंजस की स्थिति है। बढ़ते यातायात और संभावित दबाव को लेकर गंभीर चिंताएं भी सामने आ रही हैं। उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से आग्रह किया कि वे निवासियों और पर्यटकों दोनों के लिए स्पष्ट ट्रैफिक एडवाइजरी और ठोस मोबिलिटी प्लान जारी करें, ताकि इन चिंताओं को समय रहते दूर किया जा सके। उन्होंने इसे एक सक्रिय और जनहित में उठाया जाने वाला आवश्यक कदम बताया।
प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि, देहरादून शहर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह हाईवे आने वाले समय में गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकता है। देहरादून की आंतरिक सड़कें न तो पर्याप्त चौड़ी हैं, न ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम इतना सशक्त है और न ही शहर की भार अधिग्रहण क्षमता इतनी अधिक है कि वह अचानक बढ़ने वाले यातायात के दबाव को संभाल सके।
दिल्ली और हरियाणा से आने वाले पर्यटकों को मसूरी, ऋषिकेश और हरिद्वार जाने के लिए देहरादून से होकर गुजरना पड़ेगा, जिससे शहर एक ‘बॉटलनेक’ या ‘चोक प्वाइंट’ बन सकता है। ऐसे में राज्य सरकार की क्या तैयारी है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के रोड शो के लिए हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं को जबरन मानव श्रृंखला बनाने के लिए तपती धूप में घंटों खड़ा किया गया। उन्होंने कहा कि विभिन्न कॉलेजों, मेडिकल, इंजीनियरिंग संस्थानों के साथ-साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहनों, महिला मंगल दलों और फैक्ट्रियों में कार्यरत श्रमिकों तक को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने संस्थानों से लोगों को रोड शो में भेजें।
उन्होंने कहा कि, 12 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला में शामिल अधिकांश लोग स्वतःस्फूर्त नहीं थे। बल्कि उन्हें दबाव बनाकर लाया गया। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता का ग्राफ गिर रहा है और भाजपा के मंत्री, विधायक, पार्षद, जिला और ब्लॉक अध्यक्ष समेत संगठनात्मक पदाधिकारी भी स्वाभाविक रूप से भीड़ जुटाने में असफल साबित हो रहे हैं।
इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि, भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम का प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के मंच पर नजर न आना भी कई सवाल खड़े करता है।

 

पर्यावरण संरक्षण से लेकर ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने करने की पहल,1500 करोड़ की परियोजना का तैयार हो रहा खाका

देहरादून: उत्तराखंड में वन संरक्षण, आजीविका संवर्धन और जैव विविधता के संतुलन को मजबूत करने की दिशा में जायका द्वारा वित्त पोषित उत्तराखण्ड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रही है। इस कड़ी में पहले फेज के पूरा होने के बाद इसमें दूसरे फेज की तैयारी की जा रही है। इसके लिए जायका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने वन मंत्री सुबोध उनियाल से भी मुलाकात की है, जिसमें परियोजना की प्रगति और प्रस्तावित फेज-2 को लेकर विस्तृत चर्चा भी हो चुकी है।
मौजूदा समय में यह परियोजना राज्य के 13 वन प्रभागों के अंतर्गत 36 रेंजों के 839 वन पंचायतों में संचालित हो रही है। अधिकारियों के अनुसार विभिन्न कार्य मदों में लगभग शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किए जा चुके हैं, जो इस योजना की प्रभावशीलता को दर्शाता है। ईको-रेस्टोरेशन के क्षेत्र में परियोजना में बेहतर काम होने का दावा किया गया है। पहले फेज में निर्धारित 38,000 हेक्टेयर के मुकाबले 38,393 हेक्टेयर क्षेत्र में पुनर्स्थापना कार्य पूरा किया जा चुका है। यह न केवल वन क्षेत्रों के पुनर्जीवन की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि जल संरक्षण और जैव विविधता को भी मजबूती देता है। वित्तीय प्रगति की बात करें तो 807 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 95 प्रतिशत से अधिक राशि व्यय की जा चुकी है, जबकि 93 प्रतिशत से अधिक प्रतिपूर्ति दावे भी प्राप्त हो चुके हैं।

जायका परियोजना का दूसरा चरण उत्तराखंड के वन क्षेत्रों में सतत विकास को नई ऊंचाई देगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय समुदायों की आजीविका भी सुदृढ़ होगी।
-सुबोध उनियाल वन मंत्री-

यह बताता है कि परियोजना न केवल समयबद्ध है, बल्कि वित्तीय अनुशासन के साथ भी आगे बढ़ रही है। परियोजना के सामाजिक पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। 839 वन पंचायतों में 1503 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है, जबकि 20 क्लस्टर फेडरेशन भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा, राज्य स्तर पर एक शीर्षस्थ फेडरेशन की स्थापना भी की गई है, जो इन समूहों के समन्वय और सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।आजिविका संवर्धन के तहत 18 मूल्य वृद्धि श्रृंखलाओं पर कार्य किया गया है, जिसमें सेब उत्पादन, मधुमक्खी पालन और अखरोट रोपण जैसे कार्य शामिल हैं। इन गतिविधियों ने स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भू-कटाव की समस्या से निपटने के लिए भी परियोजना के तहत विशेष पहल की गई है। तीन मॉडल साइट्स और चार कैंडिडेट साइट्स पर जापानी तकनीक के अनुरूप कार्य किए जा रहे हैं, जिन्हें इस माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा संरक्षण और भूस्खलन की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। इस बीच परियोजना के दूसरे चरण यानी फेज-2 की प्रारंभिक रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। वर्ष 2026 से 2035 तक प्रस्तावित इस 10 वर्षीय परियोजना की कुल लागत 1500 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें 85 प्रतिशत हिस्सा जायका और 15 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। फेज-2 के तहत राज्य के 47 वन रेंजों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
इसमें ईको-रेस्टोरेशन, जड़ी-बूटी रोपण, आजीविका विकास, प्रशिक्षण और विशेष रूप से कृषि वानिकी पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और जैव विविधता संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। यह परियोजना उत्तराखण्ड में पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास की अवधारणा को जमीन पर उतारने का सफल प्रयास है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के लिए एक मजबूत और टिकाऊ वन प्रबंधन मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है।

 

सीनियर आईएफएस अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव,अफसरों के हुए तबादले

uttarakhand

देहरादून: उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित सीनियर आईएफएस अधिकारियों की तबादला सूची जारी हो गई है। इसमें 13 सीनियर भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव किया गया है।

प्रदेश में सीनियर वन सेवा के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। काफी समय से इन अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव को लेकर सूची का इंतजार था।

तबादला सूची में प्रमुख वन संरक्षक कपिल लाल से मुख्य वन संरक्षक पर्यावरण की जिम्मेदारी हटाते हुए उन्हें सीईओ कैंपा और नियोजन की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह प्रमुख वन संरक्षक एसपी सुबुद्धि से नोडल की जिम्मेदारी हटा दी गई है, उनके पास वन पंचायत और अध्यक्ष जैव विविधता बोर्ड के साथ ही निदेशक राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन की जिम्मेदारी बनी रहेगी।

वहीं अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडे से वन अनुसंधान प्रबंधन एवं प्रशिक्षण की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। उन्हें परियोजना एवं सामुदायिक वानिकी के अलावा सीसीएफ एडमिन की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है। तबादला सूची में अपर प्रमुख वन संरक्षक नरेश कुमार का नाम भी शामिल हैं जिन्हें मुख्य वन संरक्षक प्रशासन की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है।

 भारत सरकार से प्रति नियुक्ति के बाद उत्तराखंड लौटे सुरेंद्र मेहरा को अब वन अनुसंधान प्रबंधन एवं प्रशिक्षण के अलावा सतर्कता और विधि प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी दी गई है। मीनाक्षी जोशी को नोडल की बड़ी जिम्मेदारी सौंप गई है उनसे मानव संसाधन की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। इसके अलावा उन्हें मुख्य कार्यकारी अधिकारी बांस एवं रेशा विकास परिषद की भी जिम्मेदारी मिली है।

सुशांत पटनायक से परियोजना एवं सामुदायिक वानिकी की जिम्मेदारी वापस ली गई है। हालांकि वनाग्नि और मुख्य वन संरक्षक पर्यावरण की उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। मुख्य वन संरक्षक पी के पात्रों को मानव संसाधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। जबकि उनसे मुख्य कार्यकारी अधिकारी बांस एवं रेशा विकास परिषद की जिम्मेदारी हटाई गई है।

पंकज कुमार को निदेशक नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व से हटाते हुए उन्हें वन संरक्षक दक्षिण की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही वह क्षेत्रीय प्रबंधक वन विकास निगम रामनगर की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालेंगे। विनय कुमार भार्गव को वन संरक्षक अनुसंधान की जिम्मेदारी मिली है। इसी तरह आकाश वर्मा को वन संरक्षक नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है।

नीतीश मणि त्रिपाठी से वन संरक्षक दक्षिणी कुमाऊं की जिम्मेदारी हटाते हुए वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त की जिम्मेदारी मिली है। हाल ही में भारत सरकार से प्रतिनियुक्ति से वापस आने वाली नीतू लक्ष्मी को अब वन संरक्षक यमुना के अलावा एडिशनल सीईओ CAMPA की भी जिम्मेदारी मिली है।

दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे पर हादसा, पुलिस ने ट्रैफिक प्लान किया जारी

14 अप्रैल को दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे पीएम मोदी जनता को समर्पित करेंगे,

लेकिन उससे पहले ही एक्सप्रेस-वे पर हादसा

14 अप्रैल मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे, लेकिन उससे पहले इस एक्सप्रेस-वे पर बड़ा हादसा हो गया है । रविवार शाम को डाट काली मंदिर से करीब दो किमी पहले एलिवेटेड सेक्शन पर सिलेंडरों से भरा ट्रक अचानक बेकाकू होकर आगे चल रही कार से जा टकराया। टक्कर इतनी तेज थी कि इसके बाद पीछे आ रहे तीन अन्य वाहन भी एक के बाद एक आपस में भिड़ गए।

गनीमत रही कि इस भीषण टक्कर में कोई जनहानि नहीं हुई। एक बच्चे को मामूली चोट आई, जिसे परिजन तत्काल इलाज के लिए देहरादून के अस्पताल ले गए। हादसे के बाद दिल्ली जाने वाले मार्ग को फिर से खोल दिया गया है।

बताया जा रहा है कि आगे चल रही कार ने अचानक ब्रेक लगाए थे, जिस कारण पीछे आ रहा ट्रक आगे वाली कार से टकरा गया। इसके बाद पीछे से आ रहे अन्य वाहन भी इसी तरह आपसा में टकराते रहे। पीएम मोदी के प्रोग्राम से एक दिन पहले हुए इस हादसे से उत्तराखंड और यूपी पुलिस में हड़कंप मच गया था। तत्काल पुलिस टीमें मौके पर पहुंची और हाईवे को दुरुस्त किया।

जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी सहारनपुर जिले के गणेशपुर गांव से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे। इसलिए 14 अप्रैल शाम तक दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे को अस्थायी रूप से बंद किया है। इसके लिए पुलिस ने नया रूट प्लान भी जारी किया है।

देहरादून से दिल्ली-सहारनपुर और रुड़की आने-जाने वाले यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। देहरादून एसपी ट्रैफिक लोकजीत सिंह ने आम जनता से अपील की है कि कि वे घर से निकलने से पहले नया रूट प्लान जरूर देखें और केवल निर्धारित डायवर्जन मार्गों का ही उपयोग करें।भारी वाहनों के लिए भी यही नियम लागू किया गया है, ताकि शहर में ट्रैफिक का दबाव नियंत्रित रखा जा सके।

देहरादून शहर क्षेत्र से सहारनपुर-रुड़की-दिल्ली जाने वाले वाहन के लिए रूट प्लान-

शिमला बाईपास तिराहा-नयागांव रोड-धर्मावाला चौक-बेहट होकर अपने गंतव्य को जाएंगे।

रिस्पना पुल-जोगीवाला- लालतप्पड़-रायवाला-हरिद्वार होकर वाहन गुजरेंगे।

देहरादून शहर से छुटमलपुर-बिहारीगढ़ जाने वाले वाहनों के लिए रूट प्लान-

शिमला बाईपास तिराहा-नयागांव रोड-धर्मावाला चौक-शाकुंबरी देवी-छुटमलपुर से अपने गंतव्यों तक जाएंगे.

दिल्ली-सहारनपुर-रुड़की-छुटमलपुर से देहरादून/मसूरी आने वाले वाहनों के लिए रूट-

छुटमलपुर-बेहट-धर्मावाला चौक-प्रेमगनर-ठाकुरपुर हाईवे-प्रेमनगर चौक-बल्लुपूर चौक से अपने गंतव्यों के लिए जाएंगे।

दोपहिया और धीमी गति के वाहनों पर प्रतिबंध: एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड सेक्शन पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्णय लिया गया है। अब दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही ऑटो, ट्रैक्टर और अन्य गैर मोटर चालित वाहनों को भी प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर नियम आज से ही लागू करने के लिए कहा है। लिहाजा देहरादून से भी ऐसे वाहनों को एक्सप्रेस-वे पर जाने से रोका जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम तेज रफ्तार और हाई-स्पीड ट्रैफिक को सुरक्षित बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे न सिर्फ उत्तराखंड की राजधानी से देश की राजधानी के बीच का समय कम करेगा, बल्कि विकास का नई रफ्तार भी देगा। क्योंकि जहां पहले देहरादून से दिल्ली के बीच 6 से सात घंटे लगते थे, तो वहीं अब ये समय घटकर 2.30 घंटे का हो जाएगा। इस एक्सप्रेव के कारण देहरादून और मसूरी जैसे जगहों पर लोगों की पहुंच आसान होगी। हालांकि, कुछ देहरादून में ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की चुनौती भी रहेगी।

निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों की ठगी, आरोपी को गाजियाबाद से किया गिरफ्तार

उत्तराखंड में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं,

एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम ने इन्वेस्टमेंट के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी करने वाले साइबर आरोपी को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया। साइबर अपराधी ने पीड़ित को इन्वेस्टमेंट के नाम बड़ा मुनाफा कमाने का लालच देकर करोड़ों रुपए की ठगी की गई थी। आरोपी व्हाट्सएप ग्रुप को संचालित कर लोगों के साथ धोखाधड़ी रहे थे। व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से पहले भी पंजाब पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी भी ठगी का शिकार हुआ था, जिनसे 8 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी की गई थी। धोखाधड़ी से आहत होकर अधिकारी ने खुद को गोली मारी थी।

बता दें कि पौड़ी गढ़वाल के श्रीनगर निवासी पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 तक अज्ञात व्यक्तियों (कथित रजत वर्मा और मीना भट्ट आदि) ने पीड़ित को एक लिंक के माध्यम से व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़कर प्रतिदिन 5 प्रतिशत से अधिक मुनाफा कमाने का झांसा दिया। आरोपियों ने व्यक्ति को झांसे में लेकर अलग बैंक खातों/UPI के माध्यम से निवेश के नाम पर पीड़ित के साथ कुल 1,31,76,000 रुपये की धोखाधड़ी की गई। कुछ समय बाद पीड़ित को खुद के साथ साइबर ठगी होने का आभास हुआ, जिस पर पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया है कि साइबर क्राइम पुलिस की जांच में आरोपी की पहचान अरवाज सैफी निवासी गाजियाबाद के रूप में की गई जो अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी इन्वेस्टमेंट ग्रुप बनाकर लोगों से निवेश के नाम पर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा था। आरोपी के खाते में उक्त धोखाधड़ी से सम्बन्धित 10 लाख रुपये जमा कराए गए है। पूछताछ में आरोपी ने साइबर अपराध के लिए जिस बैंक खातों का प्रयोग किया गया है, उसमें मात्र 2 महीने में कुल 2 करोड़ रुपयों का लेन-देन हुआ है।

आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयोग मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी में प्रयुक्त 2 मोबाइल नंबर बरामद किए गए। जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित बैंक खाते के खिलाफ उत्तराखंड समेत देश के 9 राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं। जिसके सम्बन्ध में जानकारी के लिए अन्य राज्यों की पुलिस के साथ संपर्क किया जा रहा है।

उत्तराखंड STF की गिरफ्त में पाकिस्तानी हैंडलर, हैंडग्रेड गिराने के साथ मिले थे कई  टास्क

Oplus_131072

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले एसटीएफ और थाना प्रेमनगर पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी। संयुक्त टीम ने प्रेमनगर झाझरा से पाकिस्तानी आतंकियों के इशारे पर काम करने वाला गद्दार विक्रांत कश्यप को गिरफ्तार किया है । गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में विक्रांत कश्यप ने कई बड़े  खुलासे किये हैं। इन खुलासों के बाद दून में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।

एसटीएफ से मिली जानकारी के अनुसार पूछताछ में विक्रांत ने बताया कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन अल बद्र ब्रिगेड से जुड़े आतंकी शहजाद भुट्टो ने उसे टास्क पूरा करने के लिए पिस्टल उपलब्ध कराई थी। विक्रांत के पास विदेश में बनी पिस्टल भी बरामद भी की गई है। वह हिंदू आस्था से जुड़े कुछ स्थानों को भी निशाना बनाने की तैयारी में था।

पाकिस्तानी आतंकियों के साथ विक्रांत की बातचीत से कई प्रमाण मिले हैं। इसमें हैंड ग्रेनेड से हमले जैसी बातें की गई हैं। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को दिल्ली में एक संगठन के कार्यकर्ताओं पर हैंड ग्रेनेड से हमला करने का टास्क भी दिया गया था।

जांच में खुलासा हुआ कि बार-बार वह पाकिस्तान में बैठे अपने पाकिस्तानी आतंकियों से पूछ रहा था कि कहां आलू गिराने हैं। उधर से जवाब आता था कि अभी वेट करो। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आलू गिराने जैसे शब्दों का इस्तेमाल हैंड ग्रेनेड हमलों के लिए किया जाता था। इन सभी कामों के बदले उसे नेपाल के रास्ते दुबई भेजकर बसाने और मोटी रकम देने का लालच दिया गया था।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया शुरुआती जांच में पता चला है कि इसी आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों ने पंजाब में हैंड ग्रेनेड से हमले किए थे। फरवरी 2026 में पंजाब के गुरदासपुर में एक पुलिसकर्मी और एक होमगार्ड की हत्या के तार भी इसी गैंग के लोगों से जुड़ रहे हैं। जांच एजेंसियां अब इस बात की कड़ी जोड़ रही हैं कि विक्रांत कश्यप किस तरह से उस नेटवर्क का हिस्सा था, जो देश के अलग-अलग राज्यों में हमलों की साजिश रच रहा था।

साथ ही विक्रांत के पास से मिले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और चैट्स की जांच की जा रही है, जिससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। फिलहाल एजेंसी विक्रांत कश्यप के अन्य साथियों और उसके संपर्क में रहे लोगों की तलाश में जुटी है। साथ ही जांच का दायरा उत्तराखंड से बाहर अन्य राज्यों में भी बढ़ाया गया है।

उत्तराखंड केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन पर सख्ती

रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड): उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 19अप्रैल से शुरू होने वाली है। इसमें यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलेंगे, इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने हैं। जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। केदारनाथ धाम में इस साल यात्रा सीजन के दौरान वीआईपी दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब केवल सरकारी प्रोटोकॉल के तहत आने वाले व्यक्तियों को ही वीआईपी दर्शन की अनुमति दी जाएगी, जबकि आम श्रद्धालुओं को सामान्य लाइन में लगकर ही बाबा केदार के दर्शन करने होंगे।

मंदिर परिसर में इस बार मोबाइल, कैमरा, फोटो खींचने, वीडियो बनाने और ब्लॉगिंग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इससे जहां अव्यवस्था पर नियंत्रण लगेगा, वहीं धार्मिक वातावरण भी अधिक शांत और गरिमामय बना रहेगा। बता दे , हर साल वीआईपी दर्शन को लेकर अव्यवस्थाओं और पक्षपात के आरोप सामने आते रहे हैं।

तीर्थ पुरोहितों और श्रद्धालुओं द्वारा लगातार उठाई जा रही आपत्तियों के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति ने इस बार सख्त निर्णय लिया है। समिति के अनुसार अब बिना प्रोटोकॉल किसी भी व्यक्ति को वीआईपी दर्शन की अनुमति नहीं मिलेगी। इससे आम श्रद्धालुओं के साथ समानता सुनिश्चित करने और दर्शन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

बीकेटीसी के उपाध्यक्ष विजय कप्रवान ने बताया कि नई व्यवस्था से यात्रा प्रबंधन में सुधार होगा और श्रद्धालुओं को अनावश्यक लंबी प्रतीक्षा से राहत मिलेगी। अब देखना यह होगा कि मंदिर समिति के ये नए नियम धरातल पर कितने प्रभावी ढंग से लागू हो पाते हैं और क्या इससे श्रद्धालुओं को वास्तव में सुगम एवं बेहतर दर्शन का अनुभव मिल पाता है।

दूसरी ओर चारधाम यात्रा से पहले मार्गों को दुरुस्त किया जा रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग ने डेंजर जोनों की मरम्मत के लिए करीब 700 करोड़ से ज्यादा की धनराशि स्वीकृत की है। जिससे यात्रा मार्गों के संवेदनशील 100 डेंजर जोन में से करीब 80 जोन पर कार्य जारी है। वहीं तमाम विभागों और राहत बचाव दल ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं।

14 अप्रैल को टोल फ्री होगा लच्छीवाला, आशारोड़ी में भी मिलेगी राहत

पीएम मोदी के दौरे के कारण लच्छीवाला और आशारोड़ी बैरियर को टोल फ्री किया गया है,डीएम ने आदेश जारी

देहरादून: 14 अप्रैल को पीएम मोदी उत्तराखंड दौरे पर रहेंगे। इस दौरान पीएम मोदी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। इसी कड़ी में उत्तराखंड सरकार और जिला प्रशासन एक्शन में नजर आ रहा है।

देहरादून दिल्ली एक्सप्रेस वे के लोकार्पण और देहरादून में जसवंत सिंह ग्राउंड गढ़ी कैंट परिसर में आयोजित पीएम नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगो के आने की संभावना है। जिसे देखते हुए जिला प्रशासन देहरादून चाक चौबंद व्यवस्थाएं करने में जुटा है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आने वाले वाहनों शहर तथा आसपास जाम की स्थिति न बने इसके लिए जिलाधिकारी ने लच्छीवाला टोल प्लाजा को 14 अप्रैल को प्रातः 5 बजे से सांय 8 बजे तक खुला रखने के आदेश दिए है। जिसके लिए इस दौरान किसी भी निजी कमर्शियल व अन्य वाहनों का टोल टैक्स नही काटा जाएगा। मंगलवार (14 अप्रैल) सुबह 5 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक टोल प्लाजा से वाहनों का नि:शुल्क आवागमन रहेगा। जिला प्रशासन द्वारा टोल प्लाजा को नि:शुल्क रखने के आदेश दिए हैं। इस अवधि में फास्ट टैग से भी किसी प्रकार का कोई टोल नहीं वसूला जाएगा।

प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान सीमावर्ती व पर्वतीय जनपदों से बसे एवं निजी वाहनों के अधिक संख्या में कार्यक्रम स्थल पहुंचने की संभावना है। जिसके चलते टोल प्लाजा पर जाम की स्थिति न बने तथा शहर को जाममुक्त रखने तथा कानून एवं शांति व्यवस्था बनाये जाने को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने बड़ा फैसला किया है।

पीएम मोदी 14 अप्रैल को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। साथ ही पीएम मोदी उत्तराखंड की हजारों करोड़ रुपए की  परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास भी करेंगे। इनमें 1000 मेगावाट क्षमता वाले टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट, पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार और बनबसा लैंड पोर्ट शामिल है। इसके बाद प्रधानमंत्री देहरादून के गढ़ीकैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।पीएम मोदी डाट काली मंदिर में पूजा अर्चना भी करेंगे।

 

 

पूर्व सैनिक कल्याण के लिए घोषणाओं के आदेश जारी मंत्री गणेश जोशी ने दिये अग्रिम कार्यवाही के निर्देश

सुबे के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा जनपद पौड़ी के लैन्सडौन में आयोजित शहीद सम्मान समारोह में की गई महत्वपूर्ण घोषणाओं के आदेश भी जारी हो गये हैं।

उन्होंने बताया कि घोषणाओं में गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार स्थित सैनिक विश्राम गृह का जीर्णाेद्धार कर उसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा, जिससे सैनिकों एवं उनके परिजनों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। साथ ही, निदेशालय सैनिक कल्याण तथा जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालयों में पूर्व सैनिकों की नियुक्ति करते हुए निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, अन्य स्रोतों से अनुदान प्राप्त करने की बाध्यता को समाप्त करते हुए द्वितीय विश्व युद्ध के सभी पूर्व सैनिकों एवं उनकी विधवाओं को राम्भान राशि प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर, लैन्सडौन स्थित संग्रहालय के जीर्णाेद्धार के लिए भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन निर्णयों से प्रदेश के सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं के अंतर्गत विकास कार्यों पर अग्रिम प्रस्ताव अतिशीघ्र शासन को उपलब्ध प्रेषित किये जाए।