बिल्डर पुनीत अग्रवाल की गुंडागर्दी पर जिला बदर की तैयारी
केदारनाथ धाम में पहुंचे सबसे अधिक 1,24,782 तीर्थ यात्री,चार धाम में पहुंचे 2.38 लाख से अधिक श्रद्धालु
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार विगत शनिवार सांय 7:00 बजे तक श्री बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम में 02 लाख 38 हजार 590 तीर्थ यात्रियों ने दर्शनों का पुण्य लाभ प्राप्त किया। शनिवार को 55 हजार 998 से तीर्थ यात्री चार धाम पहुंचे।
श्री बद्रीनाथ धाम में कपाट खुलने की तिथि 23 अप्रैल से 25 अप्रैल तक 37,884 तीर्थयात्री धाम पहुंचे। शनिवार को धाम में 13,107 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि 22 अप्रैल से चार दिनों के भीतर 1,24,782 तीर्थयात्री धाम पहुंचे। शनिवार को धाम में 31,160 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
श्री यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम के कपट खुलने की तिथि 19 अप्रैल से 25 अप्रैल तक 75,924 तीर्थ यात्रियों ने धामों में दर्शन किए। यमुनोत्री धाम में आज 38,206 तीर्थ यात्रियों ने तथा गंगोत्री धाम में 37,718 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
चारधाम यात्रा को लेकर धामी सरकार पर बरसे गणेश गोदियाल
कांग्रेस ने अव्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा, कहा-शोबाजी कर रही सरकार
प्रदेश में विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 पकड़ने लगी रफ्तार
चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसके बाद भीड़ और व्यवस्थाओं को लेकर प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि सरकार का ध्यान यात्रा की तैयारियों पर रहा ही नहीं, बल्कि सरकार का ध्यान सिर्फ शोबाजी में केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री सिर्फ शोबाजी मे विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वास क्यों ना करें जब देश के प्रधानमंत्री शोबाजी में व्यस्त हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि उन्हें पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि यात्रा में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि मुख्यमंत्री के यात्रा का जायजा लेने के नाम पर रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी तक बाय रोड जाना यह दर्शाता है। मुख्यमंत्री अपनी सिर्फ इतिश्री कर रहे हैं. अगर मुख्यमंत्री को वाकई चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं का जायजा लेना था तो उनको यात्रा मार्गों के कठिन पैचेज में जाना चाहिए था। गणेश गोदिया ने कहा कि पिछले साल आपदा के दौरान मूलभूत सुविधाओं के साथ साथ सड़कों का जो नुकसान हुआ था, उनका पुनर्निर्माण अब तक नहीं हो पाया है। बेहतर होता कि मुख्यमंत्री को उन जगहों पर जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार का ध्यान सिर्फ इस बात पर केंद्रित है कि कहां से पैसा आए।
गोदियाल यही नहीं रुके उन्होंने कहा कि प्रदेश में चुनाव के समय झूठी लहरें बनाकर चुनाव जीत लिए जाते हैं और अगर कोई इस तरह से झूठी लहरों के सहारे चुनाव जीतता है। तो इसी तरह की तानाशाही ही करता है। अगर कोई चारधाम यात्रा में दिक्कत बताता है तो उन पर मुकदमा दर्ज करके डराओ और धमकाओ, ताकि इस तरह की पुनरावृत्ति कोई दोबारा ना कर सके। उन्होंने सवाल उठाया सरकार की चारधाम यात्रा में क्या व्यवस्थाएं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने घोड़े खच्चरों पर लगने वाले कर से होने वाली जिला पंचायत की बचत को भी खर्च कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की नजर सिर्फ पैसों पर है। गणेश गोदियाल ने आगे कहा कि उनका उद्देश्य यात्रियों को पैनिक करना नहीं है, लेकिन अगर श्रद्धालुओं को यात्रा में आना हो तो पर्याप्त समय लेकर ही यात्रा में आएं।
उत्तराखंड में तेजी से बढ़ता तापमान बड़ी मुसीबत,देहरादून में भीषण गर्मी के चलते सभी स्कूल बंद
देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी और संभावित हीटवेव के खतरे को देखते हुए विद्यालयी शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। खासतौर तमाम विद्यालयों को हीट वेव के लिए एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है। वहीं आज देहरादून में भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया। जिसके लिए देहरादून डीएम और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष सविन बंसल की ओर से आदेश जारी किया गया है।
महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि गर्मियों के दौरान छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दरअसल विभागीय स्तर पर हीटवेव के दौरान संभावित आपदाओं और आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। जिसमें कई जरूरी कदम उठाए जाने पर विचार किया गया था।जिसके लिए अब आदेश जारी किया गया है।
निर्देशों के तहत सभी विद्यालयों में नियमित अंतराल पर वॉटर बेल बजाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि छात्र-छात्राएं समय-समय पर पानी पीते रहें और डिहाइड्रेशन का शिकार न हों। विभाग का मानना है कि छोटे बच्चे अक्सर खेल या पढ़ाई में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि पानी पीना भूल जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हर विद्यालय में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। इसके साथ ही छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यकतानुसार स्कूलों के समय में बदलाव करने का विकल्प भी दिया गया है।
अगर किसी क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी पड़ती है तो वहां सुबह के समय कक्षाएं संचालित करने का निर्णय लिया जा सकता है। आदेश में यह भी कहा गया है कि कक्षाओं में पर्याप्त वेंटिलेशन यानी हवा के आवागमन की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही स्कूलों में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की सुविधाएं और आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध रहनी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद दी जा सके।
विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों को हीटवेव से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करें। इसमें धूप से बचाव, पर्याप्त पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और लक्षण दिखने पर तुरंत शिक्षक या अभिभावक को सूचित करना शामिल है।
हर विद्यालय को अपना हीटवेव एक्शन प्लान तैयार करने के लिए कहा गया है। इस योजना के तहत यह तय किया जाएगा कि आपात स्थिति में क्या कदम उठाए जाएंगे, किसे सूचना दी जाएगी और छात्रों को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा।
निर्देशों के अनुसार गर्मी के मौसम में दोपहर के समय तेज धूप में किसी भी प्रकार की खेल-कूद या बाहरी गतिविधियां नहीं कराई जाएंगी। इससे छात्रों को हीट स्ट्रोक और अन्य बीमारियों से बचाया जा सकेगा।
विद्यालयों को यह भी निर्देश दिया गया है कि छुट्टी के बाद छात्रों को समूह में घर भेजा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें सहायता मिल सके। यह कदम खासकर छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
प्रदेश में हर साल गर्मियों के दौरान तापमान में वृद्धि देखी जाती है, लेकिन इस बार हीटवेव की संभावना को देखते हुए सरकार पहले से ही सतर्क हो गई है। शिक्षा विभाग के इस फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो हजारों छात्रों को सुरक्षित रखने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि बच्चों पर गर्मी का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए स्कूल स्तर पर ऐसी व्यवस्थाएं बेहद जरूरी हैं। आने वाले दिनों में यदि तापमान और बढ़ता है तो विभाग द्वारा और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। यह आदेश न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार बदलते मौसम और उससे जुड़े खतरों को लेकर गंभीर है। अब देखना यह होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है।
28 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालेगी भाजपा
महिला सशक्तिकरण मंत्री रेखा आर्या ने कहा है कि महिला आरक्षण के विरोध में विपक्षी दलों के रुख से महिलाओं में व्यापक आक्रोश है। इस आक्रोश को अभिव्यक्ति देने के लिए 28 अप्रैल को एक दिन के विधानसभा सत्र के अलावा उसे दिन शाम को देहरादून में विशाल मशाल जुलूस निकाला जाएगा। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि विपक्षी दलों के विरोध के कारण महिलाओं को उनका लोकतांत्रिक अधिकार नहीं मिल पाया।
मंत्री ने बताया कि इन जनभावनाओं को अभिव्यक्ति देने और राज्य की आवाज को स्पष्ट रूप से सामने रखने के उद्देश्य से 28 अप्रैल को विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र आहूत किया गया है। इसके अलावा, उसी दिन शाम 6 बजे महिलाओं और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा मशाल जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस विपक्षी दलों की महिला विरोधी मानसिकता के खिलाफ आयोजित किया जाएगा।
रेखा आर्य ने पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित बैठक में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ मशाल रैली की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र और मशाल रैली में उत्तराखंड की महिलाओं की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाया जाना चाहिए, ताकि महिला आरक्षण का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों को स्पष्ट संदेश दिया जा सके।
उत्तराखंड में विशेष सत्र से पहले ‘संग्राम’, सड़कों पर उतरी कांग्रेस, सदन की भी बड़ी तैयारी
देहरादून: धामी सरकार भले ही सरकार एक दिवसीय विशेष सत्र की तैयारी में जुटी हो लेकिन इससे पहले ही राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। स्थिति यह है कि जहां सरकार सदन में महिला आरक्षण के संशोधित बिल पर विपक्ष को तगड़ा झटका देने की तैयारी कर रही है । तो वहीं कांग्रेस भी संभावित निंदा प्रस्ताव का मुंह तोड़ जवाब देने का फैसला कर चुकी है।
उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। एक ओर राज्य सरकार विधानसभा का एकदिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में जुटी है, तो दूसरी ओर इस सत्र से पहले ही राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाज़ी और सड़क पर टकराव का माहौल बन चुका है। विशेष सत्र का एजेंडा भले ही आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया हो, लेकिन यह लगभग तय माना जा रहा है कि इसका केंद्र बिंदु महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधित बिल और उससे उपजे राजनीतिक समीकरण होंगे। इसी के साथ निंदा प्रस्ताव लाए जाने की अटकलों ने सियासी माहौल को और अधिक उग्र बना दिया ।
दरअसल महिला आरक्षण को लेकर देशभर में पहले से ही बहस चल रही है। संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधित स्वरूप को पारित न करा पाने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। उत्तराखंड में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। भाजपा इस मुद्दे को महिला सम्मान और अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इस पर सरकार की मंशा और रणनीति पर सवाल उठा रही है।
विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस पहले से ही सतर्क नजर आ रही है। पार्टी को आशंका है कि सरकार इस सत्र के दौरान निंदा प्रस्ताव ला सकती है, जिसके जरिए विपक्ष को घेरने की कोशिश की जाएगी। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने सड़क से लेकर सदन तक आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि सरकार निंदा प्रस्ताव लाती है, तो उसका जोरदार विरोध किया जाएगा। सरकार की नीतियों को बेनकाब किया जाएगा। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं के हित में गंभीर होती, तो विशेष सत्र का उपयोग ठोस निर्णय लेने के लिए किया जाता। उनका कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में ही महिलाओं को 70 सीटों पर आरक्षण मिल सके। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाना महिलाओं के साथ न्याय नहीं है।
वहीं दूसरी ओर भाजपा भी पीछे हटने के मूड में नहीं है।पार्टी लगातार कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि संसद में बिल का विरोध कर कांग्रेस ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल का कहना है कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर कांग्रेस की नीयत साफ नहीं है। आने वाले समय में महिलाएं इसका जवाब जरूर देंगी।







