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खेल नीति में दिव्यांग खिलाड़ियों की अनदेखी? मंत्री के बयान से छिड़ा विवाद, विपक्ष ने सरकार को घेरा

त्रिशूल शूटिंग रेंज में दिव्यांग खिलाड़ियों को गोद में उठाकर पहुंचाने की तस्वीरों के बाद खेल मंत्री के बयान पर बढ़ा सियासी विवाद

देहरादून: उत्तराखंड में दिव्यांग खिलाड़ियों की सुविधाओं को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। राज्य सरकार जहां 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन और विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना तैयार करने का दावा कर रही है, वहीं देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज की त्रिशूल शूटिंग रेंज में दिव्यांग खिलाड़ियों को हुई परेशानियों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब खेल मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि “हमारी खेल नीति में दिव्यांग खिलाड़ी शामिल नहीं थे।” मंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए इसे दिव्यांग खिलाड़ियों की उपेक्षा करार दिया।

लिफ्ट खराब, खिलाड़ियों को गोद में उठाकर पहुंचाया गया प्रतियोगिता स्थल

हाल ही में त्रिशूल शूटिंग रेंज में आयोजित नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप के दौरान प्रतियोगिता पहली मंजिल पर आयोजित की गई थी। वहां तक पहुंचने के लिए लगी लिफ्ट खराब थी और रैंप जैसी कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में कई पैरा खिलाड़ियों को उनके परिजनों और सहयोगियों ने गोद और कंधों पर उठाकर प्रतियोगिता स्थल तक पहुंचाया। इस दृश्य ने खेल सुविधाओं की तैयारियों और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

खेल मंत्री ने जताया खेद, बयान से बढ़ा विवाद

मामले पर जब खेल मंत्री रेखा आर्या से पूछा गया कि राष्ट्रीय खेलों से पहले विश्वस्तरीय खेल सुविधाओं के विकास के बावजूद दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं क्यों नहीं की गईं, तो उन्होंने कहा कि राज्य की खेल नीति में दिव्यांग खिलाड़ियों को शामिल नहीं किया गया था। मंत्री ने इस पर खेद भी जताया, लेकिन उनका यह बयान राजनीतिक और सामाजिक बहस का कारण बन गया।

दिव्यांग खिलाड़ियों और परिजनों ने जताई नाराजगी

प्रतियोगिता में पहुंचे पैरा खिलाड़ियों और उनके परिजनों ने कहा कि किसी भी खेल परिसर का निर्माण या आधुनिकीकरण करते समय सभी खिलाड़ियों की जरूरतों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि खिलाड़ियों को गोद में उठाकर प्रतियोगिता स्थल तक ले जाना बेहद पीड़ादायक और अपमानजनक अनुभव था। यदि पहले से दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो ऐसी स्थिति नहीं बनती।

परिजनों ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने की बात तो करती है, लेकिन जब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हों, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि खेल अवसंरचना का उद्देश्य सभी खिलाड़ियों को समान अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए।

कांग्रेस ने सरकार को घेरा

मामले पर कांग्रेस ने भी सरकार को निशाने पर लिया। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने खेल मंत्री के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जब सरकार खेल नीति बनाती है तो उसे सभी वर्गों का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार खेल सुविधाओं के विकास के दौरान दिव्यांग खिलाड़ियों को भूल गई, जबकि केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर समान अवसर देने की बात की जाती है।

कांग्रेस का कहना है कि देश के पैरा खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। ऐसे में उत्तराखंड जैसे राज्य, जिसने हाल ही में राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी की, वहां दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव चिंताजनक है।

समावेशी खेल नीति की उठी मांग

इस पूरे घटनाक्रम के बाद खेल विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने भी राज्य सरकार से खेल परिसरों को पूरी तरह दिव्यांग अनुकूल बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य में बनने वाले सभी खेल परिसरों में रैंप, कार्यशील लिफ्ट, व्हीलचेयर अनुकूल रास्ते और अन्य आवश्यक सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी खिलाड़ी को केवल दिव्यांगता के कारण कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

उत्तराखंड में यह मामला अब केवल एक खेल परिसर की सुविधा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य की खेल नीति, समावेशी विकास और दिव्यांग खिलाड़ियों के अधिकारों को लेकर नई बहस का विषय बन गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए क्या ठोस व्यवस्था करती है।

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