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आकांक्षा नेगी के कथित बयान पर सियासत गरम, माफी की मांग पर अड़ा पंजाबी समाज

भाजपा प्रवक्ता कुंवर जपेंद्र सिंह का गांधी पार्क के बाहर लगातार दूसरे दिन धरना,

मुकदमा दर्ज करने की मांग; पंजाबी महासभा ने दी महापंचायत की चेतावनी

देहरादून। कांग्रेस नेता सूरत सिंह नेगी की बेटी आकांक्षा नेगी के कथित विवादित बयान को लेकर देहरादून में सियासत गरमा गई है। रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ को लेकर दिए गए कथित बयान का वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने विरोध तेज कर दिया है। वहीं, मामले को लेकर सिख और पंजाबी समाज के कुछ लोगों की आपत्ति के बाद विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कुंवर जपेंद्र सिंह ने लगातार दो दिन गांधी पार्क के बाहर धरना देकर आकांक्षा नेगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और कथित टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि एसएसपी कार्यालय के घेराव के दौरान आकांक्षा नेगी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है। वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि राजनीतिक विरोध और वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी व्यक्ति अथवा समुदाय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

गांधी पार्क के बाहर धरने पर बैठे जपेंद्र सिंह

मामले को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कुंवर जपेंद्र सिंह ने गांधी पार्क के बाहर धरना प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि कथित बयान को लेकर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और संबंधित व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि समाज की भावनाओं से जुड़ा विषय बन गया है।

वहीं, मामले में सिख समाज के कुछ लोगों ने अलग दृष्टिकोण सामने रखा है। उनका कहना है कि आकांक्षा नेगी की ओर से सिख समाज के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की गई है और सिख समाज पंजाबी समाज का ही हिस्सा है। उनका कहना है कि अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन गुरु गोविंद सिंह जी की प्रतिमा को सड़क पर रखकर कीर्तन किया जाना सिख मर्यादा के अनुरूप नहीं है।

धरने के दौरान बहस का भी आरोप

सिख समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि जब उन्होंने धरना स्थल पर इस तरीके पर आपत्ति जताई तो वहां बहस की स्थिति पैदा हुई। इसके बाद मामला और संवेदनशील हो गया। अब सिख समाज से जुड़े लोगों की मांग है कि धरने में लगाए गए बैनर से ‘सिख समुदाय’ शब्द हटाकर केवल ‘पंजाबी समुदाय’ लिखा जाए।

समाज के लोगों का कहना है कि किसी भी विवाद में पूरे समुदाय को एक साथ जोड़ना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि यदि किसी व्यक्ति के बयान को लेकर आपत्ति है तो कार्रवाई उसी व्यक्ति के खिलाफ होनी चाहिए और पूरे समुदाय को विवाद में नहीं घसीटा जाना चाहिए।

‘माफी मिलने तक धरना और अनशन जारी रहेगा’

सिख समुदाय से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने आकांक्षा नेगी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी जाती, तब तक उनका धरना और अनशन जारी रहेगा।

मामले में भाजपा प्रवक्ता और सिख समुदाय से जुड़े कुंवर जपेंद्र सिंह ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आकांक्षा नेगी को अपनी टिप्पणी के लिए सिख समुदाय से माफी मांगनी चाहिए और विवाद को जल्द समाप्त करने की दिशा में पहल होनी चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी को इस मामले में राजनीति करने के बजाय विवाद को समाप्त कराने की पहल करनी चाहिए। जपेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसी समुदाय की भावनाओं से जुड़े मामले को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

‘पंजाबी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाने का आरोप’

कुंवर जपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ पंजाबी कार्यकर्ताओं को उन्हें धरना समाप्त करने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से भेजा गया। उन्होंने कहा कि पंजाबी समाज किसी भी तरह के दबाव या धमकी से डरने वाला नहीं है और जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

हालांकि, इस संबंध में कांग्रेस की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

पंजाबी महासभा ने दी महापंचायत की चेतावनी

वहीं, मामले को लेकर उत्तरांचल पंजाबी महासभा ने भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। महासभा के महामंत्री रामकुमार फुटेला ने कहा कि यदि आने वाले दो से चार दिनों के भीतर आकांक्षा नेगी की ओर से माफी नहीं मांगी गई, तो पंजाबी महासभा की ओर से महापंचायत आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित महापंचायत में पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों से पंजाबी समाज के लोगों को बुलाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले का समाधान जल्द नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।

राजनीतिक बयानबाजी से सामाजिक विवाद तक पहुंचा मामला

आकांक्षा नेगी के कथित बयान से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर भाजपा इस मामले को लेकर कार्रवाई और माफी की मांग कर रही है, वहीं सिख समाज से जुड़े लोगों की ओर से धरने के तौर-तरीकों और बैनर में इस्तेमाल शब्दों को लेकर आपत्ति जताई जा रही है।

मामले में एक तरफ जहां भाजपा कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए विवाद को बढ़ाने का आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से पूरे प्रकरण पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर भी निगाहें टिकी हैं। फिलहाल कुंवर जपेंद्र सिंह का धरना, सिख समाज की माफी की मांग और पंजाबी महासभा की महापंचायत की चेतावनी के बाद विवाद के और गहराने के संकेत हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकलता है या फिर प्रस्तावित महापंचायत के बाद यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति और सामाजिक स्तर पर और बड़ा रूप लेगा।

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