हल्द्वानी: देश के वीर सैनिकों ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। ऑपरेशन सिंदूर जिसने दुश्मन को उसकी ज़ुबान में जवाब दिया। भारतीय सेना की इस सफलता पर जहाँ एक ओर भाजपा ‘शौर्य तिरंगा यात्रा’ निकाल रही है, वहीं कांग्रेस ने भी कमर कस ली है। कांग्रेस अब ‘जय हिंद’ रैली के ज़रिए देश के सैनिकों को सलाम करेगी और शायद सत्ता को सवाल भी।
उत्तराखंड कांग्रेस की ‘जय हिंद’ रैली की शुरुआत कुमाऊं की आर्थिक राजधानी हल्द्वानी से होगी। स्वराज आश्रम में कांग्रेस नेताओं की बैठक में इसका ऐलान हुआ। प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। कार्यकर्ताओं की भीड़ बता रही थी कि यह सिर्फ एक रैली नहीं, एक राजनीतिक संदेश है।
कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने साफ किया रैली सेना के शौर्य को सम्मान देने के लिए है। मगर साथ ही यह भी कहा कि मोदी सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विदेशी दबाव में युद्ध विराम लागू कर दिया, और एक ऐतिहासिक अवसर खो दिया।
उन्होंने गृह मंत्री के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अगर इंदिरा गांधी दो दिन और युद्ध जारी रखतीं, तो आज पीओके भारत का हिस्सा होता। करन माहरा ने पलटवार करते हुए कहा अब तो वही गलती आप दोहरा रहे हैं।
कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के एक वरिष्ठ मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्नल सोफिया का अपमान किया। यह सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, सेना के सम्मान का अपमान है। माहरा का तंज था देशभक्ति सिर्फ टीवी डिबेट्स में नहीं, मैदान में दिखती है।
‘जय हिंद’ रैली को सफल बनाने के लिए पूर्व सैनिकों को जोड़ा जा रहा है, ताकि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके। रैली का मकसद है देश को यह दिखाना कि कांग्रेस आज भी सेना के साथ खड़ी है, और राष्ट्रवाद का मतलब केवल सत्ता नहीं होता।

