HomeUttarakhandउत्तराखंड में बादल फटने और अतिवृष्टि से तबाही

उत्तराखंड में बादल फटने और अतिवृष्टि से तबाही

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी गढ़वाल और बागेश्वर जिलों में तेज बारिश और बादल फटने की घटनाओं से भारी तबाही मची है। चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के मोपाटा गांव में लैंडस्लाइड के मलबे में दबे पति-पत्नी की कई घंटों की तलाश के बाद मौत हो गई। वहीं, दो लोग भूस्खलन में घायल हो गए, जिन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है।
रुद्रप्रयाग के बसुकेदार तहसील में रात को बादल फटने से भारी विनाश हुआ। कई घर क्षतिग्रस्त हो गए, अनेक वाहन मलबे में दबे और बह गए। इस आपदा में एक महिला की मौत हुई है, जबकि आठ लोग लापता हैं। बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील के पौसारी गांव में भी भारी मलबा गिरने से छह मकान मलबे में दब गए। इस हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल है। तीन लोग अभी भी लापता हैं।
टिहरी गढ़वाल के बूढ़ाकेदार क्षेत्र में भी बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। बालगंगा और धर्मगंगा नदियां उफान पर हैं, जिससे बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। एसडीआरएफ टीम ने रुद्रप्रयाग के ग्राम तालजामल और ग्राम कुम्द में फंसे हुए ग्रामीणों को बचाने के लिए जोखिम भरे रास्तों को पार करते हुए 70 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला। टीम का नेतृत्व अपर उप निरीक्षक हरीश बंगारी ने किया।
केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने प्रभावितों से मुलाकात के दौरान उनकी व्यथा को सुनकर आंसू रोक नहीं पाए।
मौसम विभाग ने 29 अगस्त दोपहर 12:46 बजे से 30 अगस्त दोपहर 12:46 बजे तक बागेश्वर, चमोली, देहरादून, रुद्रप्रयाग समेत कई जिलों में तीव्र से अति तीव्र बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। चकराता, डोईवाला, बदरीनाथ, केदारनाथ, सोनप्रयाग, जोशीमठ, थराली, कपकोट, विकासनगर और आसपास के इलाकों में भारी बारिश, गरज- बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। एसडीआरएफ,एनडीआरएफ, डीडीआरएफ और राजस्व विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य में लगी हैं। रुद्रप्रयाग पुलिस ने रेस्क्यू के दौरान की गई कार्रवाई का वीडियो भी साझा किया है, जिसमें आपदा की विभीषिका साफ नजर आ रही है।
राज्य सरकार और जिला प्रशासन आपदा प्रभावितों को राहत पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी के बीच बचाव कार्य और मुश्किल होता जा रहा है। यह विपदा लगातार बढ़ती भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे पहाड़ों में रहने वाले लोग दहशत और संकट में हैं।

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