देहरादून, उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई। सात रणनीतिक स्तंभों पर आधारित इस नीति का उद्देश्य सहकारिता को मजबूत करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्थानीय उद्यमिता, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय सहकारी नीति-2025 की भावना ‘सहकार से समृद्धि’ को ध्यान में रखते हुए राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप नई नीति तैयार की गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में छोटी एवं सीमांत जोत, बिखरी आबादी, पलायन, सीमित औद्योगिकीकरण, जलवायु परिवर्तन और दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं की सीमित पहुंच जैसी चुनौतियों को नीति में प्रमुखता से शामिल किया गया है।
सात रणनीतिक स्तंभों पर आधारित नीति
राज्य सहकारी नीति सात प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी। इनमें सहकारिता की बुनियाद मजबूत करना, सहकारी संस्थाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना, भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करना, समावेशिता एवं पहुंच बढ़ाना, नए क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार, युवाओं को सहकारिता से जोड़ना तथा आर्थिक व्यवहार्यता और विविधीकरण शामिल हैं।
पैक्स बनेंगे ग्रामीण आर्थिक केंद्र
नई नीति में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों यानी पैक्स की भूमिका को व्यापक किया गया है। पैक्स को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इनके माध्यम से कृषि, डेयरी, बागवानी, मत्स्य, भंडारण, कोल्ड चेन, प्राथमिक प्रसंस्करण, कृषि यंत्र किराये, बीमा, पेंशन और डिजिटल बैंकिंग जैसी सेवाओं को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने की योजना है।
हिमालयी उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए छोटे सहकारी उद्यमों को क्लस्टर मॉडल से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।
महिलाओं और युवाओं को मिलेगा अवसर
नीति में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक जिले में महिला सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करने के साथ स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत ऋण और बाजार से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। युवाओं के लिए सहकारी स्टार्टअप, कौशल विकास, इंटर्नशिप, उद्यमिता और रोजगार के अवसर विकसित किए जाएंगे।
पर्यटन से लेकर ऊर्जा तक बढ़ेगा दायरा
सहकारिता का दायरा कृषि और ऋण व्यवस्था से आगे बढ़ाकर पर्यटन, होम-स्टे, इको-टूरिज्म, एग्रो-टूरिज्म, आयुष, सौर ऊर्जा, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, वन आधारित उत्पाद, औषधीय एवं सुगंधित पौधे, स्वास्थ्य सेवाएं, हस्तशिल्प और परिवहन तक किया जाएगा। राज्य में सदस्य-स्वामित्व वाली परिवहन सहकारी समितियों को बढ़ावा देने के लिए ‘सहकार टैक्सी’ जैसी पहल भी नीति में शामिल की गई है।
पलायन रोकने पर जोर
सीमांत और पर्वतीय गांवों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार और उद्यम विकसित करने के लिए सहकारिता को वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से जोड़ने की योजना है। गांव में तैयार होने वाले उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन कर उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। हब एंड स्पोक मॉडल के जरिए दुर्गम क्षेत्रों तक सहकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जाएगी।
डिजिटल और पारदर्शी होगी व्यवस्था
सहकारी संस्थाओं में कागजरहित कार्यप्रणाली, रियल टाइम लेखांकन, डिजिटल बैंकिंग, वित्तीय एवं सामाजिक ऑडिट तथा डिजिटल निगरानी को बढ़ावा दिया जाएगा। जिला सहकारी बैंकों में आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था और पैक्स-बैंक एकीकरण की दिशा में भी काम किया जाएगा।
2036 तक तीन चरणों में लागू होगा रोडमैप
राज्य सहकारी नीति-2026 का क्रियान्वयन 2026 से 2036 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। पहले चरण में कानूनी सुधार, प्रशिक्षण, संस्थागत ढांचे और डिजिटलीकरण पर जोर रहेगा। दूसरे चरण में ग्राम पंचायत स्तर तक सहकारी सेवाओं का विस्तार और मूल्य श्रृंखला आधारित क्लस्टरों का विकास किया जाएगा। तीसरे चरण में उत्तराखंड को पर्वतीय सहकारी उद्यमों के क्षेत्र में अग्रणी बनाने तथा औषधीय उत्पाद, हस्तशिल्प, दुग्ध, मत्स्य और अन्य हिमालयी उत्पादों की राष्ट्रीय एवं वैश्विक ब्रांडिंग पर जोर दिया जाएगा।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और सदस्य-केंद्रित संस्थाओं के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र के साथ उत्तराखंड अपने विशिष्ट हिमालयी सहकारिता मॉडल की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

