Saturday, February 7, 2026
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भर्ती का झूठा वादा: डीएलएड प्रशिक्षितों का दीपावली पर धरना

उत्तराखंड के चौखुटिया (गेवाड़) घाटी में काम कर रहे ऑपरेशन स्वास्थ्य आंदोलन के समर्थन एवं शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत द्वारा दिवाली तक 2100 डीएलएड प्रशिक्षितों की भर्ती करने के कथित वादे को झूठा ठहराने के विरोध में डीएलएड बेरोजगार प्रशिक्षु देहरादून में धरने पर बैठ गए हैं। मृतकों के स्मारक शहीदों के शिलापट के पास डीडी पंत पार्क में आज 21 अक्टूबर दीपावली के दिन प्रदर्शनकारियों ने एक घंटे का मौन रखकर अपनी नाराजगी और ठोस संकल्प व्यक्त किया।
प्रदर्शन के आयोजन में यूकेडी के जिला अध्यक्ष प्रताप सिंह चौहान तथा संगठन मंत्री भुवन बिष्ट भी शामिल रहे। दोनों नेताओं ने प्रशिक्षितों के साथ दिवाली न मनाने का निर्णय लिया और कहा कि यह उनका सांकेतिक विरोध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पहाड़ों के लोगों के मौलिक अधिकार शिक्षा, स्वास्थ्य व सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित नहीं की जातीं और धरातल पर भर्ती के वादे पूरे नहीं होते, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
प्रदर्शनकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा मंत्री द्वारा दी गई भर्ती की समयसीमा और आश्वासन केवल आश्वासन बनकर रह गए। स्थानीय प्रशिक्षितों ने बताया कि लंबे समय से बेरोजगारी झेल रहे 2100 से अधिक डीएलएड योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अंधकार में है और उनका मांगपत्र सुनने तक वे शांत नहीं बैठेंगे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने गहरे विश्वास के साथ कहा शहीदों के सपनों का राज्य तभी मिलेगा, जब इन बुनियादी सुविधाओं और रोजगार की गारंटी दी जाएगी; ऐसी सरकार को उखाड़ फेंकने तक हमारा आंदोलन थमेगा नहीं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से तत्काल संवाद की मांग की है और कहा कि यदि शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के स्पष्ट निर्देश और समयबद्ध योजना नहीं दी गई तो आगामी दिनों में चरणबद्ध आंदोलन, सड़क यात्रा और व्यापक धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं प्रदर्शन शांतिपूर्ण और अनुशासित रूप में संपन्न हुआ; किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
स्थानीय लोगों और परिवारों ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। संगठन के नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल रोज़गार हासिल करना नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नागरिकों को स्वास्थ्य-ओर अवसंरचनात्मक सुविधाएँ सुनिश्चित कराना भी है। वे आश्वस्त हैं कि राजनीतिक दबाव और जन-आंदोलन के माध्यम से उनकी मांगों को उठाया जाएगा।

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