देहरादून/हरिद्वार: हरिद्वार नगर निगम से जुड़े कथित 57 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में निलंबित भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों को अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। शासन स्तर पर उनके निलंबन की समीक्षा जरूर हुई, लेकिन इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया।
मामला और संवेदनशील इसलिए बन गया है क्योंकि समीक्षा बैठक से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इन अधिकारियों की बहाली की संभावनाओं को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार दबाव में आकर दोषियों को राहत देने की तैयारी में है। गोदियाल के आरोपों के बाद हुई समीक्षा बैठक पर राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा शुरू हो गई।
बीते साल 2025 में उजागर हुए इस प्रकरण में आरोप लगे कि नगर निगम की जमीन से जुड़े लेनदेन में गंभीर अनियमितताएं हुईं। तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कई अन्य कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। जांच की जिम्मेदारी आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह चौहान को सौंपी गई थी, जिनकी रिपोर्ट में प्रारंभिक गड़बड़ियां सामने आने पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर कड़ी कार्रवाई की गई।
अब निलंबन को लगभग छह महीने पूरे होने जा रहे हैं। मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में दोनों आईएएस अधिकारियों के भविष्य पर विचार किया गया, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका। आनंद वर्धन ने इसकी पुष्टि की।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बहुचर्चित जमीन घोटाले की गूंज अभी खत्म नहीं हुई है। निलंबित अधिकारियों की बहाली का मामला फिलहाल टल गया है और अब निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि इस प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई होती है और दोषियों के भविष्य पर कब तक अंतिम निर्णय लिया जाता है।


