शहर भर के बस्तियों से महिला प्रतिनिधि मुख्यमंत्री को अपने ही बयानों की याद दिलाते हुए सवाल उठाया कि जब उन्होंने 17 जनवरी को कहा था कि भाजपा सरकार एक भी मलिन बस्ती को टूटने नहीं देगी और इसके लिए मुख्यमंत्री आवास कूच किया तो पुलिस ने हाथीबडकला के पास सभी को रोक लिया और सरकार से अपना वादा न तोड़ने व लोगों को बेघर न करने की याद दिलाई।
इस अवसर पर जन हस्तक्षेप के शंकर गोपाल ने कहा कि अभी प्रशासन 873 मकानों को तोड़ने की कोशिश क्यों कर रहा है और आगे प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के लिए हजारों मकानों को खतरे में क्यों डाल रहा है? देहरा खास, कांठ बांग्ला, गांधीग्राम, सिंघल मंडी, हैप्पी एन्क्लेव, गब्बर बस्ती, चिड़ोवाली और अन्य क्षेत्र से आयी हुई महिलाएं रो रो कर सरकार की मंशा पर सवाल उठाया।
उनका कहना है कि अपने ज्ञापन में प्रतिनिधियों ने कहा कि उच्च न्यायलय के आदेशों के बहाने लोगों को बेघर किया जा रहा है, लेकिन उन लोगों को नोटिस दिया जा रहा है जो नदी से दूर है, और नदी के बीच बने रेस्टोरेंट, होटल, सरकारी बिल्डिंग इत्यादि पर कोई भी कार्यवही नहीं दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि 24 मार्च 2025 को उच्च न्यायपीठ के न्यायपीठ ने खुद प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह बड़े रसूखदारों को बचा रहे हैं, फिर भी प्रशासन की भेदभावपूर्ण कार्यवाही जारी होती हुई दिखाई दे रही है। साथ साथ में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना से बस्तियों में आतंक फैला हुआ है।
उनका कहना है कि इस परियोजना पर 6200 करोड़ खर्च करने के बजाय उसी पैसे को सिग्नल ठीक करने पर, बसों को बढ़ाने पर और लोगों को घरों देने पर खर्च किया जाये जिससे दोनों यातायात की समस्या भी और बस्ती के सवाल का भी हल होगा।
पुलिस ने प्रतिनिधि मंडल को हाथी बड़कला में ही रोक दिया। महिलाओं ने इसपर भी सवाल उठाया कि प्रतिनिधि अपने मुख्यमंत्री के घर तक भी नहीं जा सकते हैं क्या।
इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल की और से ज्ञापन दिया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में सुनीता देवी, जनतुल, सरोज, शहीदा, सीमा, पप्पू, रमन इत्यादि शामिल रहे।


