Friday, April 17, 2026
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की घोषणा, देवभूमि उत्तराखण्ड में लागू होगा ‘ग्रीन सेस’,

25वें स्थापना वर्ष पर सरकार की नई पर्यावरण पहल,

बाहरी राज्यों के वाहनों पर वसूला जाएगा सेस, वायु प्रदूषण नियंत्रण और हरित अवसंरचना पर खर्च होगा

उत्तराखण्ड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ग्रीन सेस लागू करने की घोषणा की है। यह सेस बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर वसूला जाएगा, और इससे प्राप्त राजस्व का उपयोग वायु प्रदूषण नियंत्रण, हरित अवसंरचना, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क धूल नियंत्रण में किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, उत्तराखण्ड के 25 वर्ष पूरे होने पर यह हमारी प्रतिबद्धता है कि हम राज्य को स्वच्छ, हरित और प्रदूषण-मुक्त बनाएँ। ‘ग्रीन सेस’ से प्राप्त आय का उपयोग वायु गुणवत्ता सुधार, हरित अवसंरचना और स्मार्ट यातायात प्रबंधन में किया जाएगा।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि बोर्ड के अध्ययन के अनुसार देहरादून में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत सड़क की धूल (55 प्रतिशत) है, जबकि वाहन उत्सर्जन (7 प्रतिशत) भी एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि ग्रीन सेस के माध्यम से सड़क धूल नियंत्रण और स्वच्छ वाहन नीति अपनाना शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने का सबसे प्रभावी कदम होगा।
भारत सरकार के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण – 2024 में उत्तराखण्ड के शहरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। ऋषिकेश को 14वाँ और देहरादून को 19वाँ स्थान प्राप्त हुआ। राज्य सरकार का उद्देश्य इस उपलब्धि को और सुदृढ़ करना है, और इसके लिए ग्रीन सेस से मिलने वाली आय का उपयोग किया जाएगा। राज्य सरकार ने कहा कि यह पहल उत्तराखण्ड को स्वच्छ वायु स्वस्थ जीवन की दिशा में नई पहचान देगी और राज्यवासियों के लिए स्वच्छ, हरित और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेगी।

मुख्य उद्देश्य

वायु प्रदूषण में कमी और एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) में सुधार

पुराने प्रदूषणकारी वाहनों पर नियंत्रण

स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को प्रोत्साहन

सड़क धूल, वृक्षारोपण और वायु निगरानी नेटवर्क में सुधार

मुख्य विशेषताएँ

बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूला जाएगा

इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, सोलर और बैटरी वाहनों को छूट

राज्य को अनुमानित 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की आय

राशि का उपयोग वायु निगरानी, रोड डस्ट नियंत्रण, हरित क्षेत्र विस्तार और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम पर होगा

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