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मंदिर के दान पर ‘वीआईपी खातिरदारी’: BKTC की जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में, आधी-अधूरी तफ्तीश पर उठे सवाल

  • एक तरफ होटल-रेस्टोरेंट के बिलों का सत्यापन जारी,

  • दूसरी तरफ बिना भाजपा नेताओं के बयान लिए ही तत्कालीन अफसरों को ठहरा दिया गया दोषी,

उत्तराखंड के प्रसिद्ध धामों—बदरीनाथ और केदारनाथ—को संचालित करने वाली ‘बदरी-केदार मंदिर समिति’ (BKTC) एक बार फिर बड़े विवादों के केंद्र में है। इस बार मामला आस्थावान श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के पैसों का वीआईपी मेहमानों की आवभगत में दुरुपयोग करने से जुड़ा है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर प्रकरण पर मंदिर समिति द्वारा तैयार कराई गई आंतरिक जांच रिपोर्ट खुद ही सवालों के घेरे में आ गई है।
जांच रिपोर्ट के विरोधाभासों और आधी-अधूरी प्रक्रियाओं ने अब इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
हाल ही में केदारनाथ धाम में आने वाले वीआईपी अतिथियों, विशेष रूप से सत्ताधारी भाजपा के नेताओं के ठहरने और खाने-पीने पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाने का मामला सामने आया था। इस वित्तीय अनियमितता की जांच के बाद रिपोर्ट तो सौंप दी गई है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
अधूरा सत्यापन: एक तरफ जांच रिपोर्ट खुद स्वीकार करती है कि प्रकरण से जुड़े होटलों और रेस्टोरेंट के बिलों व दस्तावेजों को सत्यापित (Verify) करने की प्रक्रिया अभी जारी है।
बिना पूरी पड़ताल के कार्रवाई: दूसरी तरफ, दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हुए बिना ही जांच रिपोर्ट में मंदिर समिति के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) विजय थपलियाल, तत्कालीन व्यवस्थापक और मुख्य प्रभारी अधिकारी को वित्तीय अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया दोषी ठहरा दिया गया है।
“हमसे तो किसी ने पूछा ही नहीं” — भाजपा विधायक का बड़ा बयान
इस जांच रिपोर्ट की सबसे बड़ी खामी यह सामने आई है कि जिन वीआईपी नेताओं पर लाखों रुपये खर्च करने के आरोप लगे हैं, जांच अधिकारियों ने उनका पक्ष जानने या उनका बयान दर्ज करने की जहमत तक नहीं उठाई।
केदारनाथ की स्थानीय भाजपा विधायक आशा नौटियाल ने खुद इस बात की पुष्टि करते हुए जांच प्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है। विधायक आशा नौटियाल का कहना है:
“बदरी-केदार मंदिर समिति की तरफ से बिलों के भुगतान या इस पूरे मामले को लेकर मुझसे कभी कोई संपर्क नहीं किया गया। इस प्रकरण में मेरा कोई बयान भी नहीं लिया गया है।”
जब मामले से जुड़े मुख्य किरदारों और वीआईपी अतिथियों से पूछताछ ही नहीं की गई, तो जांच अधिकारी किस निष्कर्ष पर पहुंचे, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

आस्था के केंद्रों पर लगातार उठते विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब बदरी-केदार मंदिर समिति अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विवादों में है। इससे पहले केदारनाथ गर्भगृह में सोने की परत चढ़ाने का मुद्दा और हाल ही में बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दान में कथित अनियमितता की खबरें सुर्खियां बन चुकी हैं।

दान चोरी के आरोपों के बीच अब ‘वीआईपी खातिरदारी’ की इस लचर और विरोधाभासी जांच रिपोर्ट ने विपक्षी दलों और आम श्रद्धालुओं को सरकार और मंदिर समिति को घेरने का एक और बड़ा मौका दे दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह जांच रिपोर्ट महज एक ‘आईवॉश’ (दिखावा) है या फिर इसके जरिए असली चेहरों को बचाकर छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है?

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