उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में पुजारी नियुक्ति को लेकर नया विवाद गहराता जा रहा है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा जारी किए गए नियुक्ति आदेश के विरोध में केदारनाथ धाम के रावल भीमा शंकर लिंग खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने इसे सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए आमरण अनशन की चेतावनी दे दी है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग भी की है।
दरअसल, गुप्तकाशी विश्वनाथ मंदिर में वर्षों से पूजा-अर्चना कर रहे पुजारी शांत लिंग का स्थानांतरण ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ कर दिया गया है। उनकी जगह ईश्वर लिंग की नियुक्ति के आदेश बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) द्वारा जारी किए गए। लेकिन इस फैसले ने मंदिर परंपराओं और अधिकारों को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है।
केदारनाथ के रावल भीमा शंकर लिंग का कहना है कि केदारनाथ परंपरा के अनुसार पंच पुजारियों की नियुक्ति केवल रावल की संस्तुति के आधार पर ही की जाती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार बिना उनकी अनुमति और संस्तुति के नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए, जो धार्मिक मर्यादाओं और पारंपरिक व्यवस्था का सीधा उल्लंघन है।
रावल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि शांत लिंग की नियुक्ति भी उनकी संस्तुति पर ही हुई थी और मंदिर में सभी धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत विधि-विधान के अनुसार संचालित हो रहे थे। ऐसे में अचानक नई नियुक्ति का आदेश जारी करना परंपरा के साथ हस्तक्षेप है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बीकेटीसी प्रशासन ने आदेश वापस नहीं लिया तो वे आमरण अनशन शुरू करने को बाध्य होंगे। इस पूरे प्रकरण को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हस्तक्षेप कर धार्मिक परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
वहीं, बीकेटीसी के सीईओ सोहन सिंह रागड़ ने कहा कि नियुक्ति संबंधी आदेश प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले में केदारनाथ रावल से वार्ता कर परंपराओं के अनुरूप समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
अब यह विवाद केवल एक पुजारी नियुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक अधिकारों के बीच संतुलन का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

