Wednesday, March 4, 2026
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कुलपति व परीक्षा नियंत्रक को किया जाये बर्खास्तः छात्र संघ

 यूटीयू सॉफ्टवेयर घोटाले की जांच में शासन के ढुलमुल रवैये से नाराज छात्रों ने सचिवालय का घेराव किया एवं तकनीकी शिक्षा सचिव के खिलाफ जमकर नारेबाजी और साथ ही शिक्षा सचिव रणजीत सिंह का पुतला फूंककर विरोध दर्ज किया और कुलपति व परीक्षा नियंत्रक को तत्काल बर्खास्त किये जाने की मांग की है।
इस अवसर पर वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में चल रहे फर्जी डिग्री जांच प्रकरण, भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनिमितताओं की शिकायतांे को लेकर डीएवी काॅलेज छात्र संघ अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल के नेतृत्व में छात्र पिछले छह माह से सड़को पर आंदोलनरत है और यूटीयू सॉफ्टवेयर घोटाले की जांच में शासन के ढुलमुल रवैये से नाराज छात्रों ने आज सचिवालय का घेराव किया एवं तकनीकी शिक्षा सचिव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और साथ ही शिक्षा सचिव रणजीत सिन्हा का पुतला फूंकते हुए सचिव के इस्तीफे की मांग की।
इस अवसर पर सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा है कि गौरतलब हो कि, हाल ही में तकनीकी शिक्षा सचिव की जांच के दौरान विश्वविद्यालय में सॉफ्टवेयर विकास के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ था । उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने लखनऊ स्थित एक कंपनी के साथ अनुबंध करके एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग ईआरपी और यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर का निर्माण कराया।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में सॉफ्टवेयर विकास के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच के लिए बीती पांच मई को पांच सदस्यीय कमेटी गठित किए जाने का निर्णय लिया गया। जांच समिति गठन करने के बाद समिति को पन्द्रह दिनों का समय भी दिया गया था। उन्होंने कहा कि इस जांच समिति में ईआरपी सॉफ्टवेयर के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया और वित्तीय अनियमितताओं की जांच का कार्य निदेशक आईटीडीए नितिका खंडेलवाल को सौंपा गया था।
उन्होंने कहा कि राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी एसआइसी, वित्त अधिकारी आईटीडीए, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर और एक अन्य अधिकारी को इस समिति में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि बीते पांच मई को जांच समिति का गठन किया गया और नौ दिन बाद यानी 14 मई को आईएएस नितिका खंडेलवाल को निदेशक आईटीडीए के पद से हटा दिया गया। उन्होंने बताया कि यह जिम्मेदारी अब आईएएस गौरव कुमार को दे दी गई है। उन्होंने कहा कि इसके बाद यह जांच फिलहाल लटकती हुई नजर आ रही है।
उन्होंने कहा कि छात्रों ने पुनः मांग की शासन की समिति की रिपोर्ट के आधार पर कुलपति डॉक्टर ओमकार सिंह एवं परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर वी के पटेल को तुरंत बर्खास्त किया जाये एवं विश्वविद्यालय के छह करोड़ रुपये के घालमेल की रिकवरी के लिए संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध ईडी की भी मदद ली जाये, उन्होंने कहा कि शासन की प्रथम जाँच रिपोर्ट में दोषी साबित होने पर भी कुलपति अभी तक विश्वविद्यालय में घूम रहे है और घोटाले के सबूतों से छेड़खानी कर रहे है और जो अब बिलकुल बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

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