उत्तराखंड में जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं. अप्रैल से सितंबर के बीच पहले चरण की शुरुआत होगी.
देहरादून: जनगणना को लेकर उत्तराखंड में तैयारियां शुरू हो गई हैं। पहले चरण में मकानों की जनगणना की जा रही है, जिसके लिए एक वेब पोर्टल और एप्लीकेशन लॉन्च किया जाएगा। जिस पर आम लोग खुद अपने मकानों की जानकारी दर्ज करा सकेंगे और जनगणना की इस राष्ट्रीय जिम्मेदारी में सहभागिता निभा पाएंगे।
देश में 2011 के बाद जनगणना को लेकर अब एक बार फिर से तैयारियां तेज हो चुकी हैं। उत्तराखंड में अलग-अलग चरणों में होने वाली जनगणना को पूरा करने के लिए जनगणना निदेशालय लगातार कार्य कर रहा है।
उत्तराखंड में जनगणना को लेकर छह महीने पहले से तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। आने वाले अप्रैल से सितंबर माह के बीच किसी एक माह में मौसम और सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड में मकानों की गणना की जाएगी। इस बार भारत सरकार द्वारा एक नई पहल की गई है। जिसमें आईटी का इस्तेमाल करते हुए मकानों की गणना से पहले आम लोगों के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। जिस पर सभी लोग अपनी तरफ से जानकारियां साझा कर सकते हैं।
दीपक कुमार का कहना है कि मकानों के सर्वे के लिए उनके इल्यूमिनेटर (प्रकाशक) जाएंगे, लेकिन उससे पहले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एप्लीकेशन वाली सुविधा आम जानता को उपलब्ध करा दी जाएगी। इस एप्लीकेशन में अपनी जानकारियां साझा करनी होंगी। कुछ सवालों के जवाब भी देने होंगे. इसमें एक आईडी जनरेट हो जाएगी। बाद में जब जनगणना प्रकाशक जाएंगे तो वह एप्लीकेशन में दर्ज जानकारियां वेरिफाइ करेंगे। उन्होंने बताया कि यह तय हो चुका है कि आने वाले अप्रैल से सितंबर माह के बीच में उतराखंड में मकानों की गणना होगी।
देश में ब्रिटिश काल में पहली बार 1872 में जनगणना हुई थी। तब से लेकर अब तक हमेशा मैन्युअल तरीके से जनगणना का काम हुआ है। लेकिन यह पहली बार है, जब जनगणना का काम डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किया जा रहा है। जनगणना के सर्वे के लिए जब उनके प्रकाशक जाएंगे तो वह डिजिटल माध्यम से वेब एप्लीकेशन पर पूरा डाटा कलेक्ट करेंगे। इस डेटा को डिजिटल माध्यम से ही सेंट्रल सर्वर में अपलोड करके सुरक्षित रखा जाएगा। अभी पहले चरण में मकानों की गणना की जा रही है और दूसरे चरण में लोगों की गणना की जाएगी। यहां सभी डाटा डिजिटल डेटा के रूप से सुरक्षित रखा जाएगा।
उत्तराखंड के जनगणना नोडल अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि, अभी पहले चरण में उत्तराखंड के सभी मकानों की गणना की जा रही है। अगले साल 2027 के फरवरी माह के 20 दिन के भीतर जन की गणना यानी लागों की गणना भी कर दी जाएगी। केंद्र द्वारा इसकी अधिसूचना जारी हो चुकी है और जनगणना के लिए फरवरी माह के दिन का समय रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस बड़े टास्क के लिए जनगणना निदेशालय को पूरा स्टाफ दिया जाएगा और यह कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाएगा। यानी बड़े स्तर पर एक बड़ा अभियान चलाया जाएगा और 20 दिन के भीतर पूरे प्रदेश की जनगणना की जाएगी।
2011 के बाद से लेकर अब तक प्रदेश में कई बड़े बदलाव आए हैं। कई नई बसावटें और भौगोलिक बदलाव आए हैं। लेकिन यह किसी भी तरह से जनगणना के कार्य को प्रभावित नहीं करता है। जहां भी मनुष्य मौजूद हैं, जनगणना स्टाफ वहां तक पहुंचेगा।
मलिन बस्तियों को लेकर बेहद भ्रांतियां हम सबके बीच में होती हैं। लेकिन जनगणना के कार्य में यह भेदभाव नहीं रहेगा। अलग-अलग कैटेगरी में मलिन बस्तियों की जनगणना की जाएगी। इन बस्तियों में रिकॉग्नाइज, आइडेंटिफाई, नोटिफाइड जैसी कई कैटेगरियां हैं। इस तरह से सभी मलिन बस्तियों को भी जनगणना के तहत काउंट किया जाएगा, उनके भी घर गिने जाएंगे और इस तरह से इस एक बेहद डिफिकल्ट टास्क को पूरा किया जाएगा।
उत्तराखंड में जनगणना के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए IAS अधिकारी दीपक कुमार ने सभी आमजन से यह अपील की है कि वह राष्ट्र निर्माण के लिए हो रहे इस जनगणना के कार्य में अपनी सहभागिता दें। जनगणना के बाद देश के विकास को एक नई दिशा मिलती है। देश में विकास योजनाओं और भविष्य को लेकर एक नया परिदृश्य सामने आता है। जिस तरह से आज के डिजिटल युग में सभी लोग टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना शुरू होने से पहले सरकार और जनगणना निदेशालय द्वारा आम लोगों के लिए वेब एप्लीकेशन लॉन्च किए जाएंगे। आप सभी उनके माध्यम से जनगणना के कार्य को सरल और सहज बना सकते हैं।


