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उत्तराखंड में विशेष सत्र से पहले ‘संग्राम’, सड़कों पर उतरी कांग्रेस, सदन की भी बड़ी तैयारी

देहरादून: धामी सरकार भले ही सरकार एक दिवसीय विशेष सत्र की तैयारी में जुटी हो लेकिन इससे पहले ही राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। स्थिति यह है कि जहां सरकार सदन में महिला आरक्षण के संशोधित बिल पर विपक्ष को तगड़ा झटका देने की तैयारी कर रही है । तो वहीं कांग्रेस भी संभावित निंदा प्रस्ताव का मुंह तोड़ जवाब देने का फैसला कर चुकी है।

उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। एक ओर राज्य सरकार विधानसभा का एकदिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में जुटी है, तो दूसरी ओर इस सत्र से पहले ही राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाज़ी और सड़क पर टकराव का माहौल बन चुका है। विशेष सत्र का एजेंडा भले ही आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया हो, लेकिन यह लगभग तय माना जा रहा है कि इसका केंद्र बिंदु महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधित बिल और उससे उपजे राजनीतिक समीकरण होंगे। इसी के साथ निंदा प्रस्ताव लाए जाने की अटकलों ने सियासी माहौल को और अधिक उग्र बना दिया ।

दरअसल महिला आरक्षण को लेकर देशभर में पहले से ही बहस चल रही है। संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधित स्वरूप को पारित न करा पाने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। उत्तराखंड में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। भाजपा इस मुद्दे को महिला सम्मान और अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इस पर सरकार की मंशा और रणनीति पर सवाल उठा रही है।

विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस पहले से ही सतर्क नजर आ रही है। पार्टी को आशंका है कि सरकार इस सत्र के दौरान निंदा प्रस्ताव ला सकती है, जिसके जरिए विपक्ष को घेरने की कोशिश की जाएगी। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने सड़क से लेकर सदन तक आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि सरकार निंदा प्रस्ताव लाती है, तो उसका जोरदार विरोध किया जाएगा। सरकार की नीतियों को बेनकाब किया जाएगा। कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं के हित में गंभीर होती, तो विशेष सत्र का उपयोग ठोस निर्णय लेने के लिए किया जाता। उनका कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि 2027 के विधानसभा चुनाव में ही महिलाओं को 70 सीटों पर आरक्षण मिल सके। उनके अनुसार, केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठाना महिलाओं के साथ न्याय नहीं है।

वहीं दूसरी ओर भाजपा भी पीछे हटने के मूड में नहीं है।पार्टी लगातार कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि संसद में बिल का विरोध कर कांग्रेस ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल का कहना है कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर कांग्रेस की नीयत साफ नहीं है। आने वाले समय में महिलाएं इसका जवाब जरूर देंगी।

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