Saturday, May 23, 2026
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100% दिव्यांग पिता और 65% दिव्यांग मां के परिवार को जिला प्रशासन का सहारा

कोविड में उजड़ा रोजगार, 64 हजार के कर्ज से दबे परिवार को डीएम ने दिलाई राहत

देहरादून। मुख्यमंत्री के जनसेवा संकल्प और मार्गदर्शन में जिला प्रशासन देहरादून ने एक बार फिर संवेदनशील एवं मानवीय प्रशासन का परिचय दिया है। आर्थिक तंगी, दिव्यांगता और कर्ज के बोझ तले दबे एक परिवार की फरियाद पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल 64 हजार रुपये से अधिक का ऋण जमा कराया, बल्कि परिवार के पुनर्वास और बेटियों की शिक्षा के लिए भी मदद के हाथ बढ़ाए।

3 बेटियों के माता-पिता दोनों दिव्यांग

ईस्ट पटेल नगर निवासी संजीव कुमार शत-प्रतिशत दिव्यांग हैं, जबकि उनकी पत्नी 65 प्रतिशत दिव्यांग हैं। परिवार में तीन नौनिहाल बेटियां हैं। सीमित संसाधनों और दिव्यांगता के बावजूद संजीव परिवार का पालन-पोषण करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन कोविड महामारी ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।

मोबाइल रिपेयरिंग का कारोबार कोविड में हुआ बंद

संजीव कुमार ने वर्ष 2018 में उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम, देहरादून से मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोलने के लिए 50 हजार रुपये का ऋण लिया था। शुरुआती दौर में उन्होंने 15 से 20 किश्तों का भुगतान भी किया, लेकिन वर्ष 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया।

आर्थिक स्थिति बिगड़ने के कारण वे ऋण की शेष किश्तें जमा नहीं कर सके। इसके बाद निगम द्वारा 64 हजार 915 रुपये की आरसी तहसील देहरादून भेज दी गई।

तहसील जेल भेजने की धमकी से परिवार में था भय

दिव्यांग दंपति केवल 3000 रुपये मासिक पेंशन के सहारे परिवार चला रहे थे। हालात इतने खराब हो चुके थे कि बेटियों की पढ़ाई भी प्रभावित होने लगी थी। संजीव कुमार ने जिलाधिकारी के समक्ष पेश होकर बताया कि अमीन द्वारा तहसील जेल भेजने की धमकी दी जा रही है, जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव और भय में जी रहा था।

डीएम सविन बंसल ने तुरंत दिए राहत के निर्देश

मामले की गंभीरता और मानवीय पक्ष को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने प्रभारी अधिकारी शस्त्र को निर्देश दिए कि संजीव कुमार की बकाया ऋण राशि सीएसआर फंड से जमा कराई जाए, ताकि परिवार को राहत मिल सके और आरसी की कार्रवाई समाप्त हो सके।

जिला प्रशासन ने सीएसआर फंड से 64,915 रुपये की ऋण राशि जमा कराई। इसके साथ ही परिवार को पुनः रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से रायफल क्लब फंड से 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई।

बेटियों को मिलेगा ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ का सहारा

जिलाधिकारी ने परिवार की तीनों बेटियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास को निर्देश दिए कि बच्चियों को “प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा” के अंतर्गत शिक्षा सहायता प्रदान करने हेतु आवश्यक कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई निर्बाध रूप से जारी रह सके।

“जिला प्रशासन की चौखट से कोई खाली नहीं लौटे”

जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल ने एक जरूरतमंद परिवार को नया जीवन और आत्मविश्वास दिया है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई में आने वाले ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता पर कार्रवाई की जाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे।

यह पूरा प्रकरण दर्शाता है कि जिला प्रशासन केवल प्रशासनिक दायित्वों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत और सहारा पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

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