Saturday, February 21, 2026
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धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड खत्म कर ,गठित उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण पर बढ़ा विवाद

उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को लेकर सियासी और सामाजिक बहस ने नया मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार जहां इसे संवैधानिक अधिकारों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में ठोस पहल बता रही है, वहीं राजनीतिक दल और संगठनों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
इन सब के बीच उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने खुलकर कहा है कि प्राधिकरण को लेकर समाज में जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। इसका मूल उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और छात्रों को बेहतर अवसर देना है। मामला इसलिए भी अहम हो जाता है, क्योंकि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थान लंबे समय से सामाजिक ताने बाने का हिस्सा रहे हैं। अब जब सरकार ने इन्हें संस्थागत ढांचे में और व्यवस्थित करने की पहल की है, तो इसे लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं।
उत्तराखंड में कई बार शैक्षिक संस्थान विवादों में पड़ते रहे हैं। मौजूदा सरकार के दौरान ही ऐसी कई चर्चाएं सामने आई हैं, जिस वजह से प्रदेश के कई ऐसे शिक्षा संस्थान देश में चर्चा में रहे हैं। अब अगर प्राधिकरण निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से काम करता तो यह संस्थानों को अनावश्यक विवादों से राहत दिला सकता है और छात्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित कर सकता है। जब सीएम धामी ने इसका गठन करने पर बयान दिया था, तो पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े संस्थानों का डाटा संकलन, पंजीकरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और शैक्षणिक मानकों की समीक्षा जैसे कदम उठाए हैं।

मदरसा शिक्षा बोर्ड के स्तर पर भी सत्यापन अभियान चलाया गया था, जिसमें कई संस्थानों की आधारभूत संरचना छात्र संख्या और पाठ्यक्रम की स्थिति का आकलन किया गया। सीएम के अनुसार इन प्रयासों का उद्देश्य किसी संस्था को बंद करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने, वित्तीय लेनदेन में स्पष्टता और आधुनिक विषयों को शामिल करने की दिशा में भी पहल की गई है। सरकार ये बात बार बार कह रही है कि कंप्यूटर शिक्षा, विज्ञान, गणित और कौशल विकास जैसे विषयों को प्रोत्साहन देने के लिए ही इस का गठन किया गया है।
-पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड-

मुफ्ती शमून कासमी का बयान- भ्रम फैलाना दुर्भाग्यपूर्ण: उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने कहा है कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को लेकर गलत धारणाएं फैलाना सही नहीं है। उनके अनुसार कुछ लोग अपने स्वार्थ के कारण समाज में शंकाएं पैदा कर रहे हैं। जबकि प्राधिकरण का मकसद शिक्षा को बेहतर बनाना और विद्यार्थियों को आधुनिक दौर के अनुरूप तैयार करना है। धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों का समावेश समय की मांग है। यदि छात्र तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा से जुड़ेंगे तो उनका भविष्य अधिक सुरक्षित होगा। प्राधिकरण के माध्यम से शैक्षणिक गुणवत्ता प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।
-मुफ्ती शमून कासमी, अध्यक्ष, मदरसा शिक्षा बोर्ड, उत्तराखंड-

 

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