काठमांडू: नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने लोकतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर देश में बढ़ते युवा असंतोष को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि शासन-व्यवस्था युवाओं की अपेक्षाओं, आकांक्षाओं और अधिकारों को संबोधित करने में विफल रहती है, तो भविष्य में व्यापक असंतोष या जनआंदोलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। राजधानी काठमांडू में आयोजित औपचारिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिणामोन्मुखी शासन प्रणाली है, जिसका उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा, समान अवसरों की उपलब्धता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि संविधान में समानता के सिद्धांत को स्वीकार किए जाने के बावजूद व्यवहारिक स्तर पर असमानता, भ्रष्टाचार और पक्षपात की प्रवृत्तियाँ लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं।
कार्की ने हाल के वर्षों में युवाओं द्वारा व्यक्त असंतोष का उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और संसाधनों पर सीमित वर्ग के नियंत्रण के विरुद्ध उठी आवाज़ों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं की ऊर्जा और परिवर्तन की आकांक्षा को अनदेखा करना किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए हितकर नहीं हो सकता।
उधर, नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने लोकतंत्र दिवस के अवसर पर अपने संदेश में देश में स्थायी शांति, सुशासन, सतत विकास और समावेशी प्रगति के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने 1950 की जनक्रांति को संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य की आधारशिला बताते हुए नागरिक अधिकारों और शहीदों के बलिदान को स्मरण करने का आह्वान किया।
इस बीच, पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने चुनाव पूर्व जारी एक संदेश में राष्ट्रीय परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए राजनीतिक स्थिरता और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। हालांकि, उन्होंने कथित ‘राष्ट्रीय संकट’ की प्रकृति को स्पष्ट नहीं किया।
नेपाल में आगामी संसदीय चुनावों से पूर्व राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। विभिन्न दलों के बीच रणनीतिक परामर्श और जनसंपर्क अभियानों के साथ-साथ युवाओं की भूमिका को इस चुनाव में निर्णायक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मत है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनविश्वास की पुनर्स्थापना आगामी समय की प्रमुख चुनौती होगी।


