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अग्निवीर योजना के विरोध में कांग्रेस का मार्च, नियमित भर्ती बहाल करने की मांग

पूर्व सैनिकों के साथ कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश कार्यालय से लैंसडाउन चौक तक निकाली रैली,

केंद्र सरकार से योजना वापस लेने की मांग

देहरादून। अग्निवीर योजना के विरोध में कांग्रेस ने देहरादून में मार्च निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से शुरू हुआ विरोध मार्च लैंसडाउन चौक तक पहुंचा और इसके बाद वापस प्रदेश कार्यालय में समाप्त हुआ। मार्च में कांग्रेस नेताओं के साथ बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने अग्निवीर योजना को वापस लेने और सेना में पूर्व की नियमित भर्ती व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई।

रैली में कांग्रेस के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष पूर्व सैनिक कांग्रेस राम रतन नेगी, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत और वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अग्निपथ योजना को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।

युवाओं और सेना के हित में नहीं योजना : कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अग्निवीर योजना युवाओं और सेना दोनों के हित में नहीं है। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था ने सेना में लंबे समय से चली आ रही नियमित भर्ती प्रणाली को प्रभावित किया है। कांग्रेस का कहना है कि सेना में जाने की तैयारी करने वाले युवाओं को पहले की तरह दीर्घकालिक सेवा का अवसर मिलना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अग्निवीर योजना के तहत सीमित अवधि की सैन्य सेवा का प्रावधान युवाओं के भविष्य को लेकर सवाल खड़े करता है। पार्टी ने दावा किया कि सत्ता में आने पर अग्निपथ योजना को समाप्त कर पूर्व की नियमित भर्ती व्यवस्था को बहाल किया जाएगा।

क्या है अग्निपथ योजना

केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में सशस्त्र बलों में सैनिकों की भर्ती के लिए अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत भर्ती होने वाले युवाओं को ‘अग्निवीर’ कहा जाता है। योजना में चार वर्ष की सेवा का प्रावधान है। चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद सभी अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा में बनाए रखने का प्रावधान नहीं है। योजना के अनुसार सेवा अवधि पूरी करने वाले अग्निवीरों में से 25 प्रतिशत तक को संबंधित सैन्य बलों में नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है, जबकि शेष अग्निवीर सेवा पूरी कर बाहर आते हैं। चयन संबंधित बल की आवश्यकताओं और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।

योजना के तहत सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को ‘सेवानिधि’ पैकेज दिए जाने का भी प्रावधान है। सरकार की ओर से योजना का उद्देश्य सशस्त्र बलों को अधिक युवा बनाने और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव लाना बताया गया है।

कांग्रेस ने उठाए स्थायी सेवा और भविष्य के सवाल

देहरादून में आयोजित मार्च के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मुख्य रूप से अग्निवीरों की सेवा अवधि और उसके बाद के भविष्य का मुद्दा उठाया। पार्टी नेताओं का कहना था कि सेना में भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं को स्थायी सेवा और भविष्य की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट अवसर मिलना चाहिए।

कांग्रेस ने कहा कि सेना केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि देश की सुरक्षा और युवाओं के लिए गौरव से जुड़ा क्षेत्र है। ऐसे में भर्ती व्यवस्था में बदलाव करते समय सैनिकों और सैन्य सेवा की गरिमा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

पूर्व सैनिक भी प्रदर्शन में हुए शामिल

प्रदर्शन में पूर्व सैनिकों की भागीदारी को कांग्रेस ने महत्वपूर्ण बताया। पार्टी नेताओं ने कहा कि सैन्य सेवा से जुड़े लोगों की ओर से उठाए जा रहे सवालों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। मार्च के दौरान पूर्व सैनिकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अग्निवीर योजना को वापस लेने की मांग को लेकर आवाज बुलंद की।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को युवाओं और पूर्व सैनिकों के बीच लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना को लेकर केंद्र सरकार को युवाओं और पूर्व सैनिकों की चिंताओं पर विचार करना चाहिए।

कांग्रेस बोली- सत्ता में आए तो खत्म करेंगे योजना

कांग्रेस नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने पर अग्निपथ योजना को समाप्त किया जाएगा। इसके स्थान पर पूर्व की नियमित सैन्य भर्ती व्यवस्था को बहाल करने की बात कही गई। पार्टी नेताओं ने कहा कि युवाओं को सेना में लंबे समय तक सेवा करने का अवसर और सैनिकों के हितों को सुरक्षित करना उनकी प्राथमिकता होगी।

देहरादून में निकाला गया मार्च ऐसे समय में हुआ है, जब अग्निपथ योजना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार सामने आते रहे हैं। कांग्रेस इसे युवाओं और पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दे के रूप में उठाती रही है, जबकि केंद्र सरकार योजना को सशस्त्र बलों में भर्ती और मानव संसाधन व्यवस्था में सुधार की पहल के तौर पर प्रस्तुत करती रही है।

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