सीबीआई की जांच के बाद सरकार सक्रिय, देहरादून की 6 संपत्तियों पर अंतरिम कुर्की के आदेश जारी
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी) घोटाले में अब कार्रवाई का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। हजारों जमाकर्ताओं की गाढ़ी कमाई से जुड़े इस मामले में सीबीआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड सरकार ने आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित कुल 34 अचल संपत्तियां चिह्नित की गई हैं, जिन पर कानूनी कार्रवाई तेज कर दी गई है।
एलयूसीसी के पदाधिकारियों पर जनता से अवैध रूप से धन जुटाने, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और अनियमित जमा योजनाओं के संचालन जैसे गंभीर आरोप हैं। इन गतिविधियों के चलते बड़ी संख्या में निवेशकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और लंबे समय से वे अपनी जमा पूंजी वापस मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एंटी करप्शन ब्रांच देहरादून को सौंपी गई थी। विस्तृत जांच के दौरान एजेंसी ने वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों का ब्योरा जुटाया। जांच में कुल 34 अचल संपत्तियां चिह्नित की गईं, जिनमें देहरादून की 6, उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी और जालौन जनपदों की 20 तथा महाराष्ट्र के नवी मुंबई और ठाणे स्थित 8 संपत्तियां शामिल हैं।
सीबीआई की संस्तुति के बाद उत्तराखंड सरकार ने बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स (BUDS) एक्ट-2019 के तहत कार्रवाई को आगे बढ़ाया है। अधिनियम की धारा 7(1) के अंतर्गत सचिव वित्त, उत्तराखंड शासन को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है, जिसके आधार पर संपत्तियों की कुर्की और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं संचालित की जा रही हैं।
सरकारी आदेश के अनुसार देहरादून में स्थित 6 अचल संपत्तियों को अंतरिम रूप से कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही इन संपत्तियों की स्थायी कुर्की और भविष्य में नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए 18 जून 2026 को प्रथम अपर जिला न्यायालय, देहरादून में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है।
वहीं उत्तर प्रदेश में चिह्नित 20 संपत्तियों को अंतिम रूप से कुर्क करने के लिए संबंधित अधिसूचित न्यायालयों से अनुमति मांगी गई है। न्यायालय की स्वीकृति मिलते ही इन संपत्तियों पर भी अंतिम कुर्की की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसी प्रकार महाराष्ट्र के नवी मुंबई और ठाणे में स्थित 8 संपत्तियों के संबंध में भी संबंधित न्यायालयों से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है।
सरकार का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल आरोपियों की संपत्तियां जब्त करना नहीं, बल्कि उन जमाकर्ताओं को राहत पहुंचाना है जिनकी जीवनभर की कमाई इस कथित घोटाले में फंस गई। BUDS एक्ट के प्रावधानों के तहत कुर्क संपत्तियों की नीलामी से प्राप्त धनराशि का उपयोग प्रभावित निवेशकों को उनकी राशि लौटाने के लिए किया जा सकता है।
उत्तराखंड सरकार के इस कदम को LUCC प्रकरण में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। सीबीआई जांच और उसके आधार पर शुरू हुई कुर्की प्रक्रिया से हजारों पीड़ित निवेशकों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। आने वाले दिनों में न्यायालयों से अनुमति मिलने के बाद कई राज्यों में फैली इन संपत्तियों पर और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
“सीबीआई की ओर से आरोपियों की संपत्ति को कुर्क करने की संस्तुति राज्य को भेजी गई है, जिस पर आगे की कार्रवाई तेजी से की जा रही है।”
— दिलीप जावलकर, वित्त सचिव, उत्तराखंड

