Sunday, May 3, 2026
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उत्तराखंड में तेजी से बढ़ता तापमान बड़ी मुसीबत,देहरादून में भीषण गर्मी के चलते सभी स्कूल बंद

देहरादून: उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी और संभावित हीटवेव के खतरे को देखते हुए विद्यालयी शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। खासतौर तमाम विद्यालयों को हीट वेव के लिए एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है। वहीं आज देहरादून में भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया। जिसके लिए देहरादून डीएम और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष सविन बंसल की ओर से आदेश जारी किया गया है।
महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि गर्मियों के दौरान छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दरअसल विभागीय स्तर पर हीटवेव के दौरान संभावित आपदाओं और आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। जिसमें कई जरूरी कदम उठाए जाने पर विचार किया गया था।जिसके लिए अब आदेश जारी किया गया है।
निर्देशों के तहत सभी विद्यालयों में नियमित अंतराल पर वॉटर बेल बजाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि छात्र-छात्राएं समय-समय पर पानी पीते रहें और डिहाइड्रेशन का शिकार न हों। विभाग का मानना है कि छोटे बच्चे अक्सर खेल या पढ़ाई में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि पानी पीना भूल जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हर विद्यालय में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अनिवार्य की गई है। इसके साथ ही छात्रों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यकतानुसार स्कूलों के समय में बदलाव करने का विकल्प भी दिया गया है।
अगर किसी क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी पड़ती है तो वहां सुबह के समय कक्षाएं संचालित करने का निर्णय लिया जा सकता है। आदेश में यह भी कहा गया है कि कक्षाओं में पर्याप्त वेंटिलेशन यानी हवा के आवागमन की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही स्कूलों में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की सुविधाएं और आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध रहनी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद दी जा सके।
विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों को हीटवेव से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करें। इसमें धूप से बचाव, पर्याप्त पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और लक्षण दिखने पर तुरंत शिक्षक या अभिभावक को सूचित करना शामिल है।
हर विद्यालय को अपना हीटवेव एक्शन प्लान तैयार करने के लिए कहा गया है। इस योजना के तहत यह तय किया जाएगा कि आपात स्थिति में क्या कदम उठाए जाएंगे, किसे सूचना दी जाएगी और छात्रों को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा।
निर्देशों के अनुसार गर्मी के मौसम में दोपहर के समय तेज धूप में किसी भी प्रकार की खेल-कूद या बाहरी गतिविधियां नहीं कराई जाएंगी। इससे छात्रों को हीट स्ट्रोक और अन्य बीमारियों से बचाया जा सकेगा।
विद्यालयों को यह भी निर्देश दिया गया है कि छुट्टी के बाद छात्रों को समूह में घर भेजा जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें सहायता मिल सके। यह कदम खासकर छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
प्रदेश में हर साल गर्मियों के दौरान तापमान में वृद्धि देखी जाती है, लेकिन इस बार हीटवेव की संभावना को देखते हुए सरकार पहले से ही सतर्क हो गई है। शिक्षा विभाग के इस फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो हजारों छात्रों को सुरक्षित रखने में मदद करेगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि बच्चों पर गर्मी का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए स्कूल स्तर पर ऐसी व्यवस्थाएं बेहद जरूरी हैं। आने वाले दिनों में यदि तापमान और बढ़ता है तो विभाग द्वारा और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। यह आदेश न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार बदलते मौसम और उससे जुड़े खतरों को लेकर गंभीर है। अब देखना यह होगा कि इन निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है।

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