- पांचवें धाम के रूप में विकसित हो रहे सैन्यधाम का निर्माण अब भी अधूरा,
- हैंडओवर के बाद उपनल संभालेगा संचालन और रखरखाव
देहरादून: उत्तराखंड में पांचवें धाम के रूप में विकसित किए जा रहे सैन्यधाम को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब सैनिक कल्याण विभाग सक्रिय होता नजर आ रहा है। करीब पांच वर्ष पहले बड़े दावों और उम्मीदों के साथ शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। हालांकि अब विभाग ने सैन्यधाम के संचालन और रखरखाव को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए इसकी जिम्मेदारी उपनल को सौंपने का फैसला किया है।
सैन्यधाम परियोजना शुरू होने के बाद से ही निर्माण कार्य की धीमी गति, लगातार बढ़ती लागत और लोकार्पण में हो रही देरी चर्चा का विषय बनी हुई है। परियोजना के लिए स्वीकृत बजट में कई बार वृद्धि होने के बावजूद निर्माण कार्य अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाया है। यही वजह है कि सैन्यधाम के भविष्य और इसके संचालन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
वर्तमान में सैन्यधाम का निर्माण कार्य पेयजल विभाग के माध्यम से कराया जा रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद परियोजना को सैनिक कल्याण विभाग को हस्तांतरित किया जाना है, लेकिन अब तक न तो निर्माण कार्य पूर्ण हो पाया है और न ही औपचारिक हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी हो सकी है।
इस बीच विभागीय स्तर पर कई दौर की चर्चाओं के बाद निर्णय लिया गया है कि निर्माण कार्य पूरा होने और हैंडओवर प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सैन्यधाम की देखरेख, सुरक्षा, साफ-सफाई और संचालन की जिम्मेदारी उपनल को सौंपी जाएगी। विभाग का मानना है कि उपनल के माध्यम से व्यवस्थाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा और पूर्व सैनिकों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सैन्यधाम मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है और इसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने इसके लोकार्पण के लिए केंद्र से समय मांगा है। साथ ही यह निर्णय लिया गया है कि हैंडओवर के बाद उपनल ही इसकी देखभाल करेगा।
सैन्यधाम को केवल एक स्मारक के रूप में नहीं बल्कि देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों की स्मृतियों को संजोने वाले राष्ट्रीय महत्व के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। परिसर में अमर जवान ज्योति स्थापित की जाएगी, जिसकी लौ को निरंतर प्रज्ज्वलित रखने के लिए गैस आधारित तकनीक के साथ बिजली आधारित वैकल्पिक व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। इससे किसी भी परिस्थिति में अमर जवान ज्योति की गरिमा प्रभावित नहीं होगी।
परियोजना के अंतर्गत एक अत्याधुनिक संग्रहालय और गैलरी भी विकसित की जा रही है। संग्रहालय में भारतीय सेना के इतिहास, वीरता और बलिदान से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री, दस्तावेज, मॉडल और स्मृति चिह्न प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके लिए सैनिक कल्याण विभाग एक अधिकारी को दिल्ली भेजेगा, जो सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों से चर्चा कर संग्रहालय की रूपरेखा तैयार करेगा।
इसके अलावा सैन्यधाम में बनने वाली गैलरी में भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की गौरवगाथा को आधुनिक तकनीक और आकर्षक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। विभाग दिल्ली स्थित विभिन्न सैन्य स्मारकों और संग्रहालयों का अध्ययन कर वहां के अनुभवों को भी सैन्यधाम में शामिल करने की योजना बना रहा है।
उत्तराखंड जैसे सैनिक परंपरा वाले राज्य के लिए सैन्यधाम केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि गौरव और भावनाओं से जुड़ा विषय है। बड़ी संख्या में सैनिक और पूर्व सैनिक देने वाले राज्य के लोग लंबे समय से इसके लोकार्पण का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग के हालिया फैसले कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं और सैन्यधाम का सपना आखिर कब साकार होता है।

