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किसान सुखवंत सिंह की मौत आत्महत्या नहीं बल्कि पुलिस-प्रशासन की प्रताड़ना और सत्ता के अहंकार

उधम सिंह नगर जिले के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या को लेकर विपक्ष लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर है। सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस मामले में बड़ा बयान दिया। उन्होंने इसे केवल आत्महत्या नहीं बल्कि पुलिस-प्रशासन की प्रताड़ना और सत्ता के अहंकार का प्रमाण बताया।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय देहरादून पहुंचे और कहा कि एक मजबूर किसान को अपनी जान देनी पड़ी। यह घटना हमें समझाती है कि जब प्रशासन अपने दायित्वों से हट जाता है और न्याय के सभी दरवाजे बंद कर देता है, तो इंसान कितना लाचार हो सकता है।
आर्य ने बताया कि सुखवंत सिंह ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बनाया था। वीडियो में उन्होंने स्पष्ट किया कि उधम सिंह नगर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और थाना इंचार्ज तक ने उनकी फरियाद नहीं सुनी। जिन लोगों ने उन्हें लगातार प्रताड़ित किया, पुलिस ने उनके शिकायती पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की। यही बेबसी सुखवंत सिंह को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का कारण बनी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, यह स्पष्ट है कि अब भू-माफियाओं और शराब माफियाओं के खिलाफ भी सरकार का गठजोड़ बन गया है। पुलिस अपने दायित्वों से हटकर इन तत्वों के हाथों में खेल रही है। कांग्रेस इस मामले को गंभीरता से ले रही है और पूरी मजबूती के साथ किसान के परिवार के साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में कमिश्नर कुमाऊँ को मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन विपक्ष इसे सिर्फ लीपापोती बता रहा है। यशपाल आर्य ने न्यायिक जांच कराने और दोषी पुलिस अधिकारियों पर हत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
बता दें कि सुखवंत सिंह अपनी पत्नी और बेटे के साथ नैनीताल जिले के काठगोदाम क्षेत्र में घूमने गए थे। तीनों एक होटल में रुके हुए थे। पत्नी और बेटे के बाहर जाने के बाद सुखवंत सिंह ने कमरे में आत्महत्या कर ली।
सुखवंत सिंह के पिता, तेजा सिंह ने बताया कि उनकी जमीन किसी फैक्ट्री प्रोजेक्ट में गई थी, जिसकी एवज में उन्हें चार करोड़ 70 लाख रुपये मिले थे। इसके बदले उन्होंने सात एकड़ जमीन लेने की योजना बनाई, लेकिन प्रॉपर्टी डीलरों ने उनके साथ धोखाधड़ी की। तेजा सिंह का आरोप है कि प्रॉपर्टी डीलरों ने उनके नाम पर फर्जी बेनामा कर दिया और पुलिस ने उनकी शिकायत गंभीरता से नहीं ली।
इस घटना के बाद कुछ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया है, जबकि कुल 26 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

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