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इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल से दून अस्पताल की सेवाएं प्रभावित, कांग्रेस ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

करीब 600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर तीन दिन से हड़ताल और कार्य बहिष्कार पर, राजेंद्र शाह बोले- सरकार जल्द बातचीत कर हड़ताल खत्म कराए

 

देहरादून। उत्तराखंड के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 600 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के पिछले तीन दिनों से हड़ताल और कार्य बहिष्कार पर रहने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने लगा है। इंटर्न डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के चलते दून अस्पताल में ओपीडी, वार्ड और ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी नियमित सेवाएं प्रभावित होने की बात सामने आई है। इससे अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इंटर्न डॉक्टर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इस मामले को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री राजेंद्र शाह ने सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर इंटर्न डॉक्टरों से बातचीत करने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की है।

सीएम और स्वास्थ्य मंत्री के सामने रखी गई थीं मांगें

कांग्रेस महामंत्री राजेंद्र शाह ने कहा कि इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी मांगों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष रखा था। ऐसे में सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से जुड़े मामलों में संवाद के माध्यम से समाधान निकालना जरूरी है। यदि डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर लगातार कार्य बहिष्कार पर रहते हैं तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल आने वाले मरीजों पर पड़ता है।

मरीजों को हो रही परेशानी

राजेंद्र शाह ने कहा कि डॉक्टरों की हड़ताल के कारण आम जनमानस को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। दून अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ओपीडी, वार्ड और ऑपरेशन थिएटर की नियमित व्यवस्थाएं प्रभावित होने से मरीजों को दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

उन्होंने कहा कि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए सरकार को मामले को लंबा खिंचने देने के बजाय तत्काल डॉक्टरों के प्रतिनिधियों से बातचीत करनी चाहिए और उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।

‘जल्द बातचीत कर हड़ताल खत्म कराए सरकार’

कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि इंटर्न डॉक्टरों के साथ तत्काल वार्ता की जाए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालकर हड़ताल समाप्त कराई जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह का व्यवधान लंबे समय तक जारी रहना आम जनता के हित में नहीं है।

राजेंद्र शाह ने कहा कि सरकार को डॉक्टरों की मांगों और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। बातचीत के जरिए ऐसा रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे डॉक्टर भी संतुष्ट हों और मरीजों को भी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए परेशान न होना पड़े।

कानून व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

राजेंद्र शाह ने इस दौरान प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आम लोगों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कानून व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी प्रभावी बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को जनहित से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए। खासकर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विवादों का समय रहते समाधान होना जरूरी है, ताकि इसका खामियाजा मरीजों और उनके परिजनों को न भुगतना पड़े।

फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में सेवाओं पर पड़ रहे असर को देखते हुए सरकार के स्तर से मामले के समाधान के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर निगाहें टिकी हैं। हड़ताल जारी रहने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका असर और बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।

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